समान शिक्षा नीति लागू करे सरकार:-सुनील

संतोष अमन की रिपोर्ट:-

परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बाॅबी ने कहा है कि अचानक बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को 50 वर्ष के बाद अक्षम घोषित कर उन्हें जबरन सेवामुक्त कर देने का जो फैसला लिया है वह हिटलरशाही फैसला है।यह निन्दनीय फरमान है। जिसका वे घोर निन्दा करते हैं,सरकार की यह तानाशाह फरमान शिक्षकों के लिए अपमानजनक है ।मैट्रिक व इंटर का रिजल्ट खराब होने का ठीकरा टीचर पर फोड़ा जा रहा है,जिसके लिए 50वर्ष की उम्र पर सेवानिवृत्त देने की बात की जा रही है। परन्तु आज 4 माह से किताब नहीं दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कियह फैसला शिक्षा में सुधार के लिए नही बल्कि अपनी ताकत की दिखावा मात्र है,जो एक तानाशाह सरकार का परिचय है।अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था को सचमुच सुधारना चाहती है तो समान शिक्षा नीति लागू करे।जहां एक गरीब परिवार के बच्चा के साथ पदाधिकारी ,विधायक और मंत्री के भी बच्चे एक साथ पढें ।सरकार  अपनी जिम्मेदारी से मुकर रही है और सारा ठीकरा शिक्षकों के माथे फोड़ रही है।शिक्षा में सुधार करने की मात्र दिखावा की जा रही है ।अगर ऐसा नही है तो फिर  शिक्षकों को  छह-सात  महीने तक भी वेतन क्यों  दिये जाते है ? विद्यालयों में जहां दस  शिक्षकों की जरूरत है वहां दो और तीन ही शिक्षक  क्यों हैं ? बच्चों को पढ़ने के लिए समय पर किताब क्यों नही मिल रहे है ?बच्चों को बैठने के लिए बेंच डेस्क और पर्याप्त वर्ग कक्ष क्यों नही है ? विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शौचालय क्यों नही ?शिक्षकों से गैर शैक्षणिक काम क्यों लिया जाता हैं ?सरकार  इन सबकी समीक्षा न कर सिर्फ शिक्षकों के खिलाफ तानाशाह फैसले लेती है जिसका वे घोर निंदा करता हैं।

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