तकनीकी ख़ामियों से प्रभावित शहर का एक मात्र रेलवे रेज़र्वेशन काउंटर

दाऊदनगर का एक मात्र रेलवे रेज़र्वेशन काउंटर तकनीकी ख़ामियों से हमेशा ग्रसित रहता है। ज़्यादातर समय यह सूचना मिलती है कि लिंक फ़ेल है पर आख़िर ऐसा क्यूँ? इस तकनीकी ख़राबी का शिकार पूरे शहरवासीयों के साथ साथ आसपास के ग्रामीण लोग भी होते हैं। जहाँ एक तरफ़ देश के प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की बात करते हैं वहीं इस प्रकार की बुनियादी इन्फ़्रस्ट्रक्चर को भी ठीक से तैयार नहीं किया गया है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाले इस प्रकार की तकनीकी ख़ामियाँ आज के इस दौर में गले नहीं उतरती।
देश के कुल आबादी का अधिकतर हिस्सा स्मार्ट्फ़ोन तथा इंटर्नेट से जुड़ा है और ऐसे में रेलवे काउंटर के एक कम्प्यूटर का लिंक फ़ेल रहना किसी मज़ाक़ से कम महसूस नहीं होता। काउंटर बंद रहने के कारण लोगों को नज़दीकी रेलवे स्टेशन अनुग्रह नारायण रोड या औरंगाबाद का रूख करना पड़ता है जो कि इस दौर में स्वीकार करने योग्य नहीं है।

वर्षों पहले शुरू हुए इस रेज़र्वेशन काउंटर में नेट्वर्किंग इन्फ़्रस्ट्रक्चर अप्डेट करने की ज़रूरत है साथ ही साथ मेन लिंक को रखते हुए बैकबोन लिंक सप्लाई की भी आवश्यकता है ताकि अगर किसी कारण मेन लिंक फ़ेल भी हो जाए तो बैकबोन लिंक से काम चलता रहे। हैरानी की बात यह है कि रेलवे का वही नेट्वर्क शहरों में निरंतर बिना फ़ेल किए काम करता रहता है पर जब अपने शहर की बात आती है तो हमेशा फ़ेल। आख़िर ऐसा क्यूँ?

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