सरकार के निर्णय से शिक्षकों का विरोध 


संतोष अमन की रिपोर्ट:-                                       

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोप गुट)के राज्य महासचिव नागेंद्र सिंह ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में बिहार सरकार द्वारा शिक्षा में बदहाली के लिए शिक्षको जिम्मेदार ठहराये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि  शैक्षणिक सत्र 2017-2018 के चार माह बीत जाने के बाद भी  छात्रों को पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने में बिहार सरकार असफल रही है।सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में लगभग दो हजार मध्य विद्यालय को उच्च विद्यालय में उत्क्रमित किया है और उच्च विद्यालय को प्लस टू विद्यालय में उत्क्रमित किया गया है । परन्तु इन विद्यालयो में विषयवार शिक्षक की नियुक्ति  नहीं की गयी है।प्रत्येक उत्क्रमित उच्च विद्यालय एवं +2विद्यालय में मात्र एक या दो शिक्षक की ही नियुक्ति की गयीहै। पुरे बिहार में लगभग छःहजार बी○आर○पी एवं सी ○आर○सी सी का पद सर्व शिक्षा अभियान मे स्वीकृत है ।इन पदों पर नियोजन का प्रावधान है।मानदेय के  लिए राशि केन्द्र सरकार से लेती है।परन्तु बिहार की सरकार नियोजन न कर  शिक्षको को ही इनपदो पर पूर्ण कालिक प्रतिनियोजन कर रखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार व सूशील मोदी की सरकार अपनी विफलता को छुपाने के लिए निर्दोष शिक्षक एवं कुछ निरीह पदाधिकारी को बलि का बकरा बनाना चाहती है।संघ बिहार सरकार के अन्याय पूर्ण निर्णय का विरोध करता है और गरीब के बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्ता पुर्ण शिक्षा से वंचित करने का बिहार सरकार की साजिश के बतौर चिन्हित कराता है।

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