
बिजली विभाग द्वारा दी जा रही सेवाओं पर पोर्टल द्वारा तीन दिन पहले एक सर्वे कराई गई थी जिसमे कई समस्यायों को चिन्हित किया गया था. उसी दौरान कुछ बुद्धिजीवियों ने अपनी राय भी साझा किया था. हैरान करने वाली टीपनियाँ जिसे बजिली विभाग पढ़ ले तो संभवतः उनको बहुत बड़ा झटका लग जायेगा।
सरकार द्वारा सुधार के कई कार्यक्रम (project) के माध्यम से विभाग को मुहैया कराए जा रहे, पर परेशानी ये है कि विभाग के अधिकारी बिना अनुभव वाले नई कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दे दे रहे हैं। नतीजा आपके सामने है, पूरे शहर के जर्जर तारों व एडिशनल ट्रांसफार्मर को बदलने की जिम्मेवारी 2 साल पहले ही दी जा चुकी है पर अनुभव की कमी के कारण तकलीफें बढ़ रही हैं।विशेष आप एक्सक्यूटिव इंजीनियर से बात करें वो आपको बताएंगे।
प्रशांत इंद्रगुरु (सामाजिक कार्यकर्ता)
बिजली आपूर्ति में कटौती से उपभोक्ता परेशान रहते हैं। खासकर मध्यम वर्ग के लोग, जिनके पास इन्वर्टर जैसी सुविधा नहीं होने के कारण बरसात के उमस भरी गर्मी में बिजली गुल रहने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रात्रि के समय तो घंटो बिजली गुल रहती है तो कभी रात-रात भर सीरीज। सबसे ज्यादा खतरनाक है बिजली के जर्जर तार और खंभे। जिससे आये दिन लोगों के जान का खतरा बना रहता है।
शाहिद क़ैय्यूम (व्यवसायी)
बिजली बिभाग राय से कभी नही चलती है इसलिए इस पर राय नही वल्कि दबाव की जरूरत होती है अकड़ के साथ बिना डरे।
अभिनव कुमार सिंह (व्यवसायी)
बिजली बिभाग के कोई अफसर का नाम बताइये जो जिम्मेवारी अपने सिर पर लेता हो? सभी का जवाब एक सा होता है कि ये समस्या का निदान यहां से नहीं ऊपर से होगा, चाहे अफसर कितना भी बड़ा हो। और आम आदमी यही ऊपर वाले को खोजते खोजते ऊपर (भगवान के पास) चला जाता है।
दीपक सिंह (पैक्स अध्यक्ष)
बिजली का तार जर्जर है जब तक पुरे शहर का तार बदला नही जाता तब तक यही समस्या बनी रहेगी। वैसे भी 2 , 4 मिस्त्री पर ही शहर टिका हुआ है। कॉल ना रिसीव करना तो आम बात है।
मुकेश मिश्रा (सामाजिक कार्यकर्ता)
लो वोल्टेज एवं जर्जर तार तो है ही लेकिन उस से भी बड़ी समस्या बिजली चोरी है. फेज़ टू फेज़ करके अपने घर के वोल्टेज तो बढ़ा लेते हैं पर दूसरे घर लो वोल्टेज की समस्या बन जाती है. क्या जिसके घर के पास तार नजदीक है वो मनमानी करेगे? टोकन फंसा के चोरी करेंगे? आखिर इस पर कार्यवाई क्यों नही होती है? ऐसा नही है की बिजली विभाग को पता नही है. सुचना मिलने पर कुछ दिन जाँच चलता है फिर कुछ दिन के बाद फिर वही सिलसिला। वार्ड नंबर 9 में तो और बुरा हाल है रात में टेलीविज़न भी नही चल पाता है, पंखा तो बस हिलता है।
संतोष अमन (लोक कलाकार)
अवैध रुप से बिजली उपयोग होता है या नहीं? यदि होता है तो कार्रवाई होती है या नहीं? साथ ही यदि कोई अवैध रुप से बिजली उपयोग करता है तो नुकसान क्या सिर्फ सरकार को होता है या उपभोक्ता को भी होता है? मेरी समझ है कि नाजायज तरीके से बिजली उपयोग करनेवाले लोग असली उपभोक्ता को नुकसान पहुंचाते हैं और यह भी समस्याओं का जड़ है।
ओम् प्रकाश गुप्ता (पत्रकार)
आज से लगभग 3 , 4 साल पहले गुलाम सेठ चौक पे ट्रांसफार्मर लगाया गया था। उस ट्रांसफार्मर का 11 हज़ार वाल्ट का तार बारुण रोड से मदरसा इस्लामिया होते हुए गुलाम सेठ चौक गया है। जो की काफी संकीर्ण और चालू रास्ता है। इस रास्ते में माली टोला, बारादरी, यादव टोली, बालूगंज, मिया मोहल्ला पुरानी शहर के लोग जाते है। ये रास्ता सिर्फ रात के लगभग 2, 3 घंटा ही बंद रहता है।
11 हज़ार का तार महिना में एक या दो बार जरूर शार्ट करता है और जिस से काफी आग फेकता है और काफी आवाज़ होती है।शॉर्ट करने के कारण अगल बगल के घरों का भो नुकसान होता है। किसी के यह ट्यूब लाइट तो बल्ब या पंखा या मीटर जल जाता है। जब से लगा है कई बार शार्ट कर के ज़मीन पर भी गिरा है। लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। आज भी सुबह गुल्लू साहब के घर के पॉल पे खूब तेज़ आग लगा और इंसुलेटर टूट के उनके घर में गिरा।
इसी रास्ते में मदरसा भी है जहाँ छोटे छोटे बच्चे पढ़ने आते है। जब से 11 हज़ार का तार लगा है तब से हम ने कितनी बार बिजली executive, sdo, j e , mistry सब से कह कर थक गया हूं कितनी बार आवेदन भी दिया हु लेकिन आज तक 11 हज़ार टार में गॉर्ड वायर नहीं लगा। आज फिर सुबह SDO साहब से बात किया तो उनके द्वारा फिर आश्वाशन दिया गया है कि बहुत जल्द गार्ड वायर लगा दिया जाएगा।
हम तमाम इस रोड से जाने वाले लोगो से निवेदन / आग्रह करते है कि आप लोग भी गॉर्ड वायर लगाने के लिए अपने तरफ से भी इस कार्य को कराने की कृपा करें। ताकि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना से आने जाने वाले लोग बच सके।
अनवर फ़हीम (सामाजिक कार्यकर्ता)
पुरे बाजार में 11 हजार वोल्टेज वाला तार का गार्ड नही है, पहले इसे पर काम किया जाए। गर्मी के दिनों में बिजली काफी कम मिलता है।
धर्मदेव कुमार (स्थानीय निवासी)
दाउदनगर का बिजली विभाग है, लापरवाह और अनुभवहीन विभागीय अधिकारियो का शिकार । इस विभाग के एसडीओ यहां रहते ही नही हैं । जनसंख्या और मकान की संख्या दिनोंदिन बढते ही जा रही है, लेकिन उसके अनुपात में ट्रांसफरमर की संख्या बहुत कम बढ रही है। खम्भे पर लगाने वाले किट की क्वॉलिटी घटिया है जिसके कारण प्रतिदिन कहीं न कहीं फाल्ट होता है।कार्यालय मे संबंधित समग्री की कमी है ।हमारे समझ से जरजर तार व खम्भे उतना नुकसानदेह नही हैं जितना जरजर दिमाग वाले पदाधिकारी , अगर इनकी मानसिकता ठीक हो जाए तो 75 प्रतिशत समस्या का समाधान जरूर हो सकता है|
संजय सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता)
हमारे गांव में विद्युत सुधार के लिए पिछले 13 सालों से लड़ रहा हूँ कई फैसले हमारे पक्ष में हुए यहां तक कि लोक जान शिकायत कार्यालय से भी मेरे पक्ष में फैसले हुए , विभाग को 15 दिन की मोहलत दी गई इसके बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।
दयाभूषण आर्य (स्थानीय निवासी)
वैसे समस्या तो तीनों है,परन्तु अगर बिजली की तार और ट्रांसफॉर्मर को ठीक किया जाए तो वोल्टेज की समस्या भी सुधर जायगी।है ये भी सच है बहुत लोगो के यह बिजली बिल को लेकर भी समस्याएं है उसे पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
रजनीश यादव (स्थानीय निवासी)
पुरे दाउदनगर की गली और रोड का तार पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, हमेशा खतरा बना रहता है. और जिसके कारन बार बार तार गिरते है और कोई अनहोनी हमेशा घटित होती रहती है . और उसके बाद किसी भी तरह की घटना होने पर बिजली बिभाग को जवाबदेह बनना पड़ेगा। अगर ये हो जाता है तो दाउदनगर की बिजली की समस्या ख़तम हो जाएगी
अरुण कुमार (व्यवसायी)