निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फ़ी वसूलना अभिभावकों के लिए बोझ

राशिद इमाम की रिपोर्ट:

दाऊदनगर के निजी संस्थानों में महंगी शिक्षा प्रणाली पर अंकुश लगाने की जरूरत है। सरकारी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और संसाधनों की कमी के चलते छात्रों को निजी संस्थानों में भरी भरकम फ़ीस देना पड़ रहा है। इसके चलते आज भी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे बेहतर शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे है। निजी विद्यालयों में एक बार पुनः बढ़ी हुई फ़ीस की वसूली का सिलसिला जारी है। 

बच्चो के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर लाचारी में अभिभावक समझौते के लिये विवश दिखाई दे रहे है और बढ़ी हुई फ़ीस जमा कर रहे है। साल के हर बार मार्च या अप्रैल के महीने में स्कूली बच्चों की फ़ीस, किताब, यूनिफ़ॉर्म पर खर्च होने के कारण लोग सोचने पर मजबूर हो जा रहे है। हर बार बच्चो की नई कक्षा में जाने की तैयारी के साथ घर की बजट में दूसरी चीजों में कटौती शुरू हो जाती है। आख़िरकार बच्चो के बेहतर भविष्य के आगे ऊन्हे स्कूली प्रबन्धन के सामने घुटने टेकने पड़ते है।

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