जनता की आवाज़- अधिकार चाहिए तो कर्तव्य के प्रति रहें जागरुक


जनता को बिजली जैसी मूलभूत सुविधा सुचारु पूर्वक चाहिए, लेकिन बिल भुगतान की जो स्थिति है उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि हम अपने अधिकार के प्रति तो जागरुक हैं परंतु इसी प्रकार की जागरुकता अपने कर्तव्य के प्रति नहीं दीखाते। यह हर क्षेत्र में देखा जा रहा है। यहां पर मैं बिजली की बात इसलिए कर रहा हूं कि बिजली हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल है और बिजली आपूर्ति बाधित होते ही हम सीधे तौर पर बिजली विभाग और सरकारी तंत्र को कोसना शुरु कर देते हैं। 

आम तौर पर यदि किसी तकनीकी कारणवश बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो तुरंत बिजली विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मोबाइल बजने लगते हैं। हांलाकि तकनीकी खराबी उत्पन्न होने पर जल्द से जल्द उसे दूर कर बिजली आपूर्ति बहाल करने का भरपूर प्रयास किया जाता है। यह तकनीकी बाधा का कारण जर्जर तार या अन्य कारणों होते हैं। मुझे जो जानकारी मिली है उसके अनुसार हमें बिजली तो चाहिए लेकिन बिल जमा करने में हम काफी पीछे हैं। 

विभागीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार दाउदनगर शहर में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब सात हजार है। बीस से बाइस घंटे तक बिजली आपूर्ति होती है। औसतन प्रतिमाह करीब 15 लाख रुपये का राजस्व का बिल आता है। भुगतान करीब 40 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं द्वारा ही किया जा रहा है। इससे भी बुरी स्थिति ग्रामीण क्षेत्र की है। दाउदनगर के ग्रामीण क्षेत्र और ओबरा प्रखंड में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या करीब 25 हजार है, जबकि भुगतान करीब 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं द्वारा ही किया जा रहा है। 

ग्रामीण क्षेत्र में करीब 16 से 18 घंटे तक बिजली आपूर्ति हो रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आम जनता बिजली आपूर्ति की अपेक्षा तो करती है लेकिन राजस्व के मामले में यह क्षेत्र फिसड्डी साबित हो रहा है। राजस्व जमा करने के मामले में जागरुकता की कमी दीख रही है। हांलाकि एक तथ्य यह भी है कि काफी संख्या में उपभोक्ताओं द्वारा बिल नहीं मिलने या समयानुसार बिल नहीं मिलने की शिकायत भी रहती है। लेकिन क्या उन्होंने कभी कार्यालय जाकर शिकायत करने की कोशीश की है। सिर्फ आरोप लगाने और कोसने से नहीं होगा हमें जागरुक होकर तत्परता दीखानी होगी।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.