दाउदनगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीके प्रसाद के पुत्र डॉ. संजीव कुमार अमेरिका के साउथ कैरोलिना में कार्यरत हैं। जहाँ पर ओ अपना निजी अस्पताल भी चलाते हैं। उनके दाऊदनगर आगमन पर दाऊदनगर के वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र कश्यप ने उनसे बातचीत की। उनसे बातचीत के दौरान कई रोचक एवं सिखने योग्य तथ्य सामने आए।
डॉ.संजीव ने बताया कि अमेरिका में समानता है जहाँ इंसान आपस में फर्क नहीं करते। उदाहरण देते हुए बताया कि भारत में जाति, रंग और पहनावे का भेद है। आदमी आदमी के बीच फर्क मानवता का विरोधी है और समाज के विकास में बाधक भी। उन्होंने कहा कि आदमी आदमीं के बीच फ़र्क़ किए बिना समाज या देश का विकास सम्भव नहीं है।
जनता को देश के लिए पहल करनी चाहिय नाकी सिर्फ़ देश से अपेक्षाएँ पालनी चाहिए। एक अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि यह पूछने से पहले कि “देश ने आपके लिए क्या किया है” ख़ुद विचार करें कि “आपने देश के लिए क्या किया है”?कहा कि स्वच्छता को ही लीजिए-क्या हम कचड़ा सड़क पर ही फेंकेंगे। खुद से भी तो सामुदायिक पहल कर एक डस्टबीन लेकर रख सकते हैं। जिसमें समीप के लोग अपने घर का कचड़ा रखें और एक आदमी को पैसे दे कर उसे प्रशासन द्वारा तय स्थान पर फ़ेंकवाया जा सकता है। इससे स्वच्छ समाज बनेगा। कहा कि बुराई या कमी अमेरिका में भी है। वहां की राजनीति में भी भारत की तरह कई खामी है। किंतु उससे सीखने लायक भी बहुत कुछ है।
डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि वहां लोग कानून का पालन करते है, जबकि भारत में तोड़ना शान और शक्ति की परिचायक है। यह मानसिकता कई तरह की समस्या खड़ी करता है। भारत में सिविक सेंस का घोर अभाव है। बताया कि एक बार दो बजे रात्रि को वे डियूटी से घर जा रहै थे। ट्रैफिक पर लाल बत्ती जली तो वे ठहर गए। जा भी सकते थे क्योंकि कोई नहीं था। किंतु ऐसा नहीं किया। भारत में ऐसी उम्मीद किसी से क्या डॉक्टर से भी नहीं की जा सकती।
भारत में गंदगी व गंदे लोग- सिया
डॉ. संजीव की बेटी सिया मात्र सात साल की है। क्लास टू की छात्रा है। बोलती है-भारत में गंदगी है, और लोग गन्दे हैं। अपने घर की गंदगी घर के पीछे या सामने ही फेंक देते हैं। हालांकि पापा के विरुद्ध उसने कहा-कहीं डस्टबीन भी नहीं है, पापा। कहां कचड़ा फेंकेंगे लोग?
