विशेष: हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी, तब शहर और देश बदलेगा

जहँगीर अख़्तर की रिपोर्ट:
हम दाऊदनगरवासी दाऊदनगर के होने पर गर्व महसूस करते हैं क्यूँकि हमें इस ऐतिहासिक शहर का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शहर का गौरव दाऊद ख़ान का क़िला आज भी कई ऐतिहसिक पहलुओं को जोड़ता है। क़िले के इमारत की हालत दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। सरकार की नज़रें करम हुई तो कुछ वर्ष पहले यहाँ चारदीवारी का काम किया गया। सफ़ाई कार्य करवाया गया था। सफ़ाई के बाद नगर वासियों को कुछ उम्मीद जगी थी कि शायद अब बहुत कुछ बदलने वाला है। उस समय क़िले की पूर्ण घेरा बंदी नहीं हो पाई थी जिसके चलते पालतू जानवरों का चरागाह तो कभी स्वच्छ भारत मिशन को चिढ़ता हुआ खुला शौचालय बना रहा।

क़िले की सौंदर्यिकरण एवं संरक्षण के लिए कई बार आवाज़ उठाई गई। मीडिया के माध्यम से भी उसे प्रकाश में लाने की पुरज़ोर कोशिश की गई। विभिन्न डोक्यूमेंट्री फ़िल्मों के माध्यम से क़िले की महत्तता को दर्शाया गया। इतने कुछ के बाद इस वर्ष सरकार की नज़रे-इनायत हुई और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हुआ। क़िले के दोनो मुख्य द्वार को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया जिससे लोगों और जानवरों का प्रवेश वर्जित हो। क़िले के अंदर रास्ते बनाए जा रहे हैं, शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। कार्य की गति धीमी है परंतु कुछ तो हो रहा है।

मगर हम दाऊदनगर वासियों में से कुछ लोग अपनी हरकत से अब भी बाज़ नहीं आ रहे हैं। चारदीवारी और अस्थाई रूप से मुख्य द्वार को बंद करने बावजूद शौच करने क़िले के अंदर ही जाएँगे। पता नहीं यह नवाबी बस्ती से जुड़े होने का प्रभाव है कि क़िले के अन्दर शौच ना करें तो अपनी बदनामी हो जाएगी या क़िला के क्षेत्र कभी साफ़ सुथरा ना रहने देने को क़समें खाकर बैठे हैं? जो भी हो, हमें बदलना होगा, हमारी मानसिकता बदलनी होगी तभी हमारा शहर और देश बदलेगा।

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