संतोष अमन की रिपोर्ट:
फ़र्ज़ी डॉक्टरों के ख़िलाफ़ जन अधिकार छात्र परिषद् के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कुमार यादव, प्रदेश महासचिव विजय कुमार एवं नगर अध्यक्ष भास्कर पाण्डेय ने प्रेस ब्यान जारी कर कहा कि औरंगाबाद जिले में लगातार फर्जी डॉक्टर के कारण आम आदमी की ज़िंदगी दावँ पर लगी है। पिछले दिनों डॉक्टर आसित रंजन के द्वारा इलाज के बहाने पिछडी जाति के शख़्स के किडनी निकालने का ख़बर प्रकाश में आया था।ऐसे लोग डॉक्टर हैं या हत्यारा? ऐसे लोगों पर कारवाई करने में कोताही क्यूँ बरती जाती है? क्या सत्ता में बैठे नेताओं को यह दिखाई नहीं देता कि गरीब, पीड़ित, कमजोर, शोसित, दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक को आजादी के बाद भी इस तरह के लोगों का शिकार बनते जा रहे हैं?
ये लालु यादव और नीतीश कुमार सिर्फ गरीबों के बीच जाति का जहर फैला कर सत्ता में काबिज रहने का प्रयास करते रहते हैं। उतना तो बीजेपी वाले भी नही ठगे हैं। बीजेपी वाले कम से कम बोल देते हैं कि मैं सत्ता में आया तो व्यापारी, पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों की मदद करेंगे, किसान का लोन माफ नही करेंगे मगर शराब माफिया बिजय माल्या का लोन माफ कर देंगे। ये तो सब जानतें हैं कि BJP वालों की यही नीति है। मगर ये महागठबंधन के लोग सिर्फ अपने निजी विकाश की योजना बनाते हैं। लालू अपने दोनों बेटे को तीन तीन मंत्रालय दे दिए उसमे दो दलित को देते या कोई मुस्लिम को दे देते नहीं तो मगध में कोई यादव को मंत्री बना देते मगर ऐसा नहीं।