भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष शंभू कुमार ने पशु चिकित्सकों के खाली पड़े पदों पर जल्द से जल्द बहाली करने की मांग सरकार से की है ।उन्होंने पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग बिहार के प्रधान सचिव को एक पत्र भेजा है, जिसकी प्रतिलिपि औरंगाबाद डीएम एवं ओबरा विधायक को भी भेजी गई है।पत्र में उन्होंने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है।कृषि में पशुओं का अहम योगदान है। पशु चिकित्सक की कमी होने के कारण पशुपालक परेशान हैं। पशुओं के उपचार की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है ।प्रैक्टिशनर से इलाज कराना पड़ता है।औरंगाबाद जिले के कई पशु अस्पतालों में चिकित्सक का पद खाली है। कहीं-कहीं प्रभार के सहारे चल रहा है।कहा की कृषि तो पशुओं का, इसमें अहम योगदान है। सदियों से मनुष्य किसी न किसी तरीके से पशुओं पर निर्भर हैं और देश की अर्थव्यवस्था में १६प्रतिशत लगभग पशुओं का योगदान है। परन्तु दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्रों में पशुओं के स्वास्थ्य स्तर नगण्य है, जिसका असर पशुपालकों पर पड़ रहा है। पशुओं में होने वाली बीमारी जैसे:- पशुओं में खरहा – मंहपका रोग, लीवर -फ्लूक (छेरारोग), धनैला रोग, लम्पी त्वचा रोग, पुंछकटवा रोग इत्यादि है पर इनके रोगों के इलाज एंव उपचार की कोई व्यवस्था प्रणाली नहीं है। प्रैक्टिस वाले चिकित्सक से इलाज कराना पड़ता है, जिससे पशुओं की क्षति के साथ -साथ किसानों की आर्थिक मार झेलना पड़ रहा है। और आवेदन में बतलाया गया है की औरंगाबाद जिलें के पशु अस्पतालों में चिकित्सक का पद खाली पड़ा है, जहाँ चिकित्सक बहाल है व प्रभार में है। हालत यह है कि जिले के सभी ११प्रखण्डों में पशु चिकित्सा पदाधिकारी का पद खाली पड़ा है, जिले में कुल ३५ अस्पताल संचालित है इसमें १४ भ्रमणशील पशु चिकित्सक कार्यरत है, शेष पशु अस्पतालों में पशु चिकित्सकों का पद रिक्त है। ऐसे में औरंगाबाद जिलें के पशु अस्पतालों में चिकित्सक का पद खाली पड़ा है, यह साबित करता है कि सरकार का ध्यान पशु अस्पतालों की ओर नहीं है। अगर पशु अस्पतालों में चिकित्सक को बहाल कर दिया जाए तो बीमार पशुओं का इलाज के लिए भाग – दौड़ करने की जरुरत नहीं पडे़गी, पशुओं में समय पर टीकाकरण, पशु धन बीमा योजना एंव रोगों का बचाव का प्रचार -उपचार से पशुपालक सदैव खुशहाल एंव हमारा समाज स्वस्थ्य रहेगा..
