दाउदनगर (औरंगाबाद):
वसीम बरेलवी ने कभी कहा था – जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगा, किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता। यह बात दाउदनगर अनुमंडल के ओबरा प्रखंड के विशुनपुरा निवासी राव रणविजय सिंह पर पूरी तरह से चरितार्थ होती है।जिन्होंने मुम्बई में टीवी एवं फिल्म इंडस्ट्री में अपना खास मुकाम बनाया है।येबिहार के औरंगाबाद जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
श्री राव लालू यादव पर बनी फिल्म लालटेन में नज़र आने वाले हैं।फ़िल्म में सशक्त किरदार निभाते हुए दिखेंगे।इससे पहले भीे लगभग एक हज़ार से ज्यादा एपिसोड अलग अलग टीवी धारावाहिकों में अभिनय कर चुके हैं ।
बिहार के औरंगाबाद जिला के फिल्मी दुनिया का उभरता हुआ कलाकार है राव रणविजय।मुँबई की दौड़ती भागती जिंदगी से उसे जब भी फुरसत मिलती है,भाग कर बिहार आता है,यहाँ के गाँव-कस्बे,खेत खलिहान की ज्वलंत समस्या पर लघु फिल्म बना डालता है-‘कहीं का ईंट,कहीं का रोड़ा,भानुमती ने कुनबा जोड़ा के स्टाईल में स्थानीय संसाधनों के भरोसे। श्री राव अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण से भी जुड़े हुए हैं उन्होंने हाल ही में अपने गृह जिला के कला संस्कृति पर्यटन शिक्षा इतिहास को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए एक फिल्म का निर्माण किया जिसका नाम एक सुखद यात्रा औरंगाबाद है। इस फिल्म 3 जुलाई 2016 को औरंगाबाद के ऐतिहासिक नगर भवन में दर्शकों के बीच प्रदर्शित किया गया था। इन्होंने हाल में ही एक शैक्षणिक फिल्म मास्टर साहब भी बनाया है।
किसी परिचय का मोहताज नही:
बिहार के औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड स्थित एक छोटा सा गांव बिशनपुरा के रहने वाले राव रणविजय सिंह का जन्म 13 सितंबर 1988 में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ओबरा में हुई। दिल्ली से सूचना एवं तकनीकी में स्नातक करने के बाद इनका रूख अभिनय की तरफ हुआ। वर्ष 2009 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रंगमंच से जुड़े एवं 2 वर्ष तक अभिनय में शिक्षा प्राप्त किया। 2011 में प्रसिद्ध टीवी निर्माती एकता कपूर के प्रथम भोजपुरी धारावाहिक सिंदूर मांग टिकुली में एक सशक्त किरदार निभाते हुए आज मुंबई में पिछले 5 वर्षों से लेकर अलग-अलग शॉर्ट फिल्म, फिल्मों एवं धारावाहिकों में लगभग 1000 से भी ज्यादा एपिसोड कर चुके हैं ।जिनमें सावधान इंडिया, हिटलर दीदी ,यह रिश्ता क्या कहलाता है ,ससुराल गेंदा फूल ,हैप्पी होम्स ,इस टाइम टू चेंज आदि आदि प्रमुख हैं। ये हर वर्ष अपने जिले औरंगाबाद आते हैं और सामाजिक फ़िल्म बनाते रहते हैं जिसमें यंहा के स्थानीय कलाकारों को भी मौका देते हैं।
