चाय की दुकान पर चुनावी चकल्लस

ओबरा विधान सभा का चुनाव अब जोर पकड़ने लगा है।इससे दाउदनगर शहर भी पीछे नही है।
चौक चौराहों पर चुनावी चर्चा लोगों पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। जहा देखो बस चर्चा, चुनाव आम दिनचर्या पर हावी है। चाय की दुकानों पर जमावड़ा लगाने वाले चाय पर चर्चा करते-करते इतने मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें इल्म ही नहीं होता कि परछाइयां अब छोटी से बड़ी हो चली है। बेचारे दुकानदारों की चुनाव में मानो शामत ही आ गई है चुनावी चर्चा ने नाक में दम कर दिया है। चर्चा करते हुए लोग कभी कभार इतने उग्र हो जाते हैं कि कुश्ती के सभी दाव को भी आजमाने को आतुर भी हो जाते हैं। चुनावी चकल्लस में कोई फला के जितने के लिए नुक्सा बता रहा है तो कोई किसी को मात देने के वास्ते खामिया और नकामिया को पब्लिक तक पहुंचाने के रास्तों को बता रहा है। अभी बात खत्म भी नहीं हुई कि एक अन्य व्यक्ति आते ही का हो चाचा कवन पार्टी के जितावे हरावे के फेरा में पड़ गइल हइ भोरे। बहरहाल सार्वजनिक स्थानों पर चुनावी कमेंट्री और नोकझोक का अखाड़ा बन गया है। जहा लोग अपने सरोकारों की कम और चुनाव को प्रभावित करने वाले पैरामीटर्स की बातें ज्यादा करते हैं। हद तो तब हो जाती है जब घटो चाय की दुकानों पर चुनावी चुस्की की बातें करने वाले दुकानदार से यह कहकर रुखसत होते हैं कि चाय के पईसा खाता में लिख लिह। हालांकि क्षेत्र का कोई भी चौक चौराहा नहीं जहा पर लोग जमा हो और चुनाव की बातें न हो।

ऐसा ही नजारा नगरपरिषद के निकट एक चाय की दुकान पर दिखी जब दो उम्मीदवारों के बारे में चर्चा हो रहा था।एक ने पिछले चुनाव का परिणाम का लिस्ट दिखा कर बोला कि देखिए पिछले बार जब महा गठबंधन था तो इतना मत आया था। अब दोनो अलग है अब इसमें से गुना भाग कीजिए। कहा कि वैसे भी आप लोग ही न कहते थे कि ईमानदार प्रत्यासी को जिताईए तो इस बार ईमानदार व लोकल आए हैं तो क्यों न उन्हें ही जिताया जाए,दूसरे ने कहा कि यह सही बात है पर मुझे तो मुख्यमंत्री के पद पर किसी को बैठाना कुछ भी हो इस सरकार परिवर्तन हो रहा है।इतने में दुकानदार ने बोला कि भैया बहस मत कीजिए परिणाम सामने आ जायेगा, पैसा चाय की दीजिए दुकान बंद कर घर जाना है।इतना कहते ही सभी हंसते हुए निकल पड़ते हैं।

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