आज देश कि राजनीति में चुनावी मुद्दा सिर्फ दलित महादलित समाज के उत्थान को लेकर गरमाई रहती है दूसरी तरफ चापुक पंचायत के पोखराहा गांव निवासी विनय रविदास ने अपने तीनो बच्चों सहित दादर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश शर्मा के घर पर मदद मिलने कि अपेक्षा लेकर धरना दे दिया है।विनय रविदास कि पत्नी कि मृत्यु ढाई साल पहले कैंसर से हुई थी धनाभाव के कारण वेंकटेश शर्मा ने चंदा इकट्ठा कर विनय कि पत्नी को दिल्ली एम्स भेजकर इलाज करवाया एवं सर्जरी के समय खून के साथ साथ एक सहयोग के लिए अटेंडेंट कि भी व्यवस्था करवाया इसके बावजूद पत्नी आठ माह से ज्यादा नहीं बची।विनय ने कहा कि पत्नी के गुजर जाने के बाद हमें सरकारी अनाज ढाई साल से मिलना बंद हो गया है।घर मे एक कमरा है उस पर भी रहने के लिए छत नहीं है जब बरसात होता है तब हम किसी प्रकार से गुजर बसर करते हैं।पत्नी का देहांत पर कबीर अंत्येष्टि कि राशि भी नहीं मिला जब मुखिया के पास गया तब उसने भी डांट कर भगा दिया।अपने घर एवं बच्चों कि परेशानी से लाचार होकर मैं वेंकटेश शर्मा के घर पर आया हूँ क्योंकि पत्नी का इलाज भी इन्होंने हि किया अब हमारे परिवार के लिए भी जो हो करें हम इनके घर पर लगातार आते रहेंगे इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
