प्लाज्मा डोनर ढूंढना अब भी मरीजों के परिजनों के लिए आसान नहीं है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आगे बढ़कर प्लाज्मा दान कर रहे हैं और दूसरों के लिए नजीर पेश कर रहे हैं ।कोरोना विजेता राजद आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं रेड क्रॉस सोसाइटी उपशाखा दाउदनगर के सचिव डॉ प्रकाश चंद्रा ने अपना प्लाज़्मा दान कर एक कोरोना पॉजेटिव चिकित्सक की जान बचाई है।यही नहीं गजब उत्साह व युवा जोश वाले डाँ प्रकाश ने डॉक्टरों को कह दिया है कि वह 14 दिन बाद बार-बार प्लाज्मा डोनेट करने को तैयार हैं।डाँ प्रकाश ने बताया कि अखिलेश पांडेय जो रेलवे के उच्च अधिकारी आई आर टी एस धनबाद का फोन आया कि उनके एक मित्र दरभंगा के चिकित्सक डॉक्टर विमल प्रसाद को बी पोजेटिव ब्लड ग्रुप का प्लाज़्मा चाहिए तो उन्होंने बताया कि मेरा ओ पॉजिटिव ब्लड है जो यूनिवर्सल ग्रुप है ये किसी को भी दिया जा सकता है।फिर उन्होंने मरीज के पत्नी से बात की उन्होंने एम्स के डॉक्टरों से बात कर कहा कि आपका प्लाज्मा उपयोग के लायक है।उन्होंने एम्स जाकर प्लाज्मा डोनेट किया। कहा कि इसमे कोई परेशानी नही होती है। न कोई कमजोरी होती है।जिनको मैने प्लाज्मा दिया उनको मैं जानता भी नही।पर ईश्वर ने मुझे करोना से ठीक किया मैं किसी के काम आ सकू ये अवसर दिया ।मुझे खुशी है कि मैं किसी के काम आ सका । उन्हीने बताया कि कोरोना से जंग जीतने के बाद ठान लिया था कि वे कोरोना संक्रमितों की मदद करेंगे ।आगे भी करते रहेंगे ।बताया गया कि प्लाज्मा रक्त में उपलब्ध एक तरल पदार्थ होता है। इसका 92 फीसदी भाग पानी होता है। प्लाज्मा में पानी के अलावा प्रोटीन, ग्लूकोस मिनरल, हार्मोंस, कार्बन डाइऑक्साइड होते हैं। शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन रक्त के प्लाज्मा द्वारा होता है। इनके अतिरिक्त रक्त में सिरम एल्बुमिन, कई तरह के प्रोटीन और इलेक्ट्रॉलाइट्स भी पाए जाते हैं। वहीं, रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाले हिमोग्लोबिन और आयरन तत्व की वजह से खून लाल होता है। हृदय शरीर में रक्त का संचार करता है। कोरोना के अटैक के बाद शरीर वायरस से लड़ना शुरू करता है। यह लड़ाई एंटीबॉडी लड़ती है, जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती है। अगर शरीर पर्याप्त एंटी बॉडी बना लेता है तो कोरोना हार जाता है।
