राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने का करना चाहिए प्रयास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कर्मभूमि को


दाउदनगर प्रखंड के चौरम में स्थित चौरम आश्रम की जमीन पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई गई ।इस अवसर पर नवयुवक संघ द्वारा दौड़ एवं खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। उपस्थित लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस कर्मभूमि को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।उनके विचारधारा और दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए चौरम आश्रम की जमीन को विकसित किया जाना चाहिए।यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी कर्मभूमि आश्रम वीरान पड़ी हुई है ।प्रखंड प्रमुख अनिल कुमार, मुखिया संघ दाउदनगर के अध्यक्ष एवं अंकोढ़ा पंचायत के मुखिया कुणाल प्रताप, तरार पंचायत के मुखिया सर्वोदय प्रकाश शर्मा, करमा पंचायत मुखिया प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार ,अंछा पंचायत मुखिया प्रतिनिधि अजीत कुमार, महिला कॉलेज के सचिव रघुवंश प्रसाद सिंह, अधिवक्ता आलोक कुमार सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।कहा गया कि 9-10 फरवरी 1939 को दाउदनगर प्रखंड के चौरम के ऐतिहासिक व पावन धरती पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आगमन हुआ था। तब किसानों, खेत मजदूरों, स्वतंत्रता सेनानियों का चतुर्थ गया जिला सम्मेलन संपन्न हुआ था, जिसमें भाग लेने के लिए इस पावन स्थल पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहुंचे थे।मुखिया प्रतिनिधि ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संगमरमर की प्रतिमा लाकर स्थापित कर दी गई है ।अगले वर्ष 2021 में 23 जनवरी या 9 फरवरी को प्रतिमा का अनावरण कराया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक बैठक आयोजित किया जाएगा और आगे का निर्णय लिया जाएगा।

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