
आज़ादी के इतने दिनों बाद भी ग्रामीण इलाकों में अस्पताल की कमी महसूस की जाती है।कई गांव में कई ऐसे मरीज हैं जो इलाज के आभाव में दम तोड़ रहे हैं।
गोह प्रखंड के बहुरिया बर्मा निवासी सुदर्शन मिश्रा पिछले एक वर्ष से कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि इलाज तो दूर घर का दो समय का भोजन भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो पाता है।दादर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश शर्मा द्वारा सुदर्शन मिश्रा के इलाज के लिए समय समय पर लोगों से चंदा लेकर सहयोग किया जाता है और वे अभी तक तीस हजार रुपया दे चुके हैं। वेंकटेश ने बताया कि दो दिन पहले सुदर्शन मिश्रा का फोन आया कि इलाज के लिए पटना जाना है, लेकिन उनके पास पैसा नहीं है एवं महाबीर कैंसर संस्थान पटना के चिकित्सक तीन बोतल खून भी मांग किये हैं।चार माह पहले भी वेंकटेश ने परिवार के खून देने से मुकर जाने पर चार बोतल खून दिलवाया था।वेंकटेश ने सुदर्शन मिश्र को आर्थिक सहयोग करते हुए कहा कि जहां तक संभव होगा,वे सहयोग के लिए तैयार हैं एवं वहां उपस्थित लोगों को बताया कि आजादी के सत्तर वर्ष से अधिक होने के बावजूद भी इस देश के ग्रामीण इलाकों में एक अच्छा अस्पताल नहीं है। वेंकेटेश ने लोगो को सलाह दिया कि कैंसर रोगी के प्रति हमेशा हमदर्दी रखें।