योजना के नाम पर हो रही धोखाधड़ी,बेचे जा रहे हैं फर्जी फॉर्म।

शहर में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर धड़कले से फर्जी फार्म बेचे जा रहे हैं इस योजना का फार्म भरने के बाद बेटी के शादी के लिए दो लाख सरकार के द्वारा दी जाने की बात कही जा रही है इस के चक्कर में लोग फंसते जा रहे हैं।
भाजपा के नगर अध्यक्ष शंभू कुमार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर चल रहे फर्जी फॉर्म की ओर अनुमंडल पदाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कार्रवाई करने की मांग की है श्री कुमार ने बताया कि उनके द्वारा डाक के माध्यम से एक आवेदन शनिवार को एसडीओ को भेजा गया है।इससे पहले उन्होंने 26 फरवरी को भी 2018 को भी जिला पदाधिकारी को पत्र लिखा लिखा था ।आवेदन में भाजपा नगर अध्यक्ष ने कहा है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के नाम पर फर्जी फॉर्म बेचे जा रहे हैं, जिससे आम लोग ठगे जा रहे हैं ।शहर के विभिन्न बुकस्टॉल एवं फॉर्म की दुकानों पर फर्जी फॉर्म बेचा जा रहा है, जिस पर रोक लगाये जाने की आवश्यकता है। श्री कुमार ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का शुभारंभ केंद्र सरकार द्वारा लिंग के अनुपात में समानता लाने की दिशा में उठाया गया एक सराहनीय कदम है। बालिकाओं का अस्तित्व सुरक्षा सुनिश्चित करना एवं सामाजिक आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान का कार्यान्वयन कर सामाजिक परिवर्तन लाना है।मगर इस योजना के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है और दाउदनगर शहर में भी फर्जी फॉर्म बिक रहे हैं।
50 रुपये से ज्यादा हो रहे हैं खर्च:
पांच रुपये से लेकर 50 रुपए विभिन्न बुक स्टोर पर बेचा जा रहा है।सूत्रों ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर जो फर्जी फॉर्म बाजार में बिक्री की जा रही है ,उसमें करीब 50 रुपये से अधिक रुपये आवेदक युवतियों द्वारा खर्च किए जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार एक फॉर्म की कीमत पांच रुपये और लिफाफा की कीमत पांच रुपये यानी 10 रुपये में उन्हें फॉर्म मिल रहा है।अब तो कुछ फोटो कॉपी दुकानों ने भी फॉर्म का फोटो कॉपी कर पांच रुपये में बेचना शुरू कर दिया है।डाकघर में रजिस्ट्री शुल्क 22 रुपया है, लेकिन डाकघर के सूत्रों का कहना है कि अधिकांश रजिस्ट्री न कर स्पीड पोस्ट कर रही हैं, जिसमें 41 रुपये खर्च आ रहे हैं। यानी इस प्रकार देखा जाए तो एक फोटोग्राफ्स को लेकर सिर्फ आवेदन भेजने में 50 रुपये से भी अधिक खर्च प्रति आवेदक हो रहे हैं।इसके अलावे सदुरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से आवागमन करने में अतिरिक्त भाड़ा खर्च भी लग रहा है। इस प्रकार यह फर्जी फॉर्म के चक्कर में आवेदकों का एक सौ से भी अधिक रुपया बेवजह खर्च हो रहा है।

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