नहीं सुधर रही स्वास्थ्य सेवायें, निजी चिकित्सक के पास इलाज कराने को विवश है लोग

बेटा-बेटी एक समान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बेटी है तो कल है जैसे तमाम नारों की गूंज भले ही पूरे देश में सुनाई दे रही हो। मगर आज भी तमाम परिवार ऐसे हैं जहां बेटे की चाह में बेटी जनने पर दुखी हो जाते हैं। सरकार द्वारा जहां बेटियों के उत्थान के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी समाज में बेटियों के प्रति नकारात्मकता का कुछ भाव आज भी देखने को मिल रहा है तो दूसरी तरफ अनुमंडल अस्पताल दाउदनगर में उद्घाटन के करीब चार वर्ष पूरा होते समय भी स्वास्थ्य सेवायें समुचित तरीके से मुहैया नहीं हो पाई है।एक साथ दो प्रकरण बीती रात घटी और यह प्रकरण उक्त दोनों बिंदुओं पर सवाल खड़ा करती हैं और समाज को सोचने पर विवश कर देती है।प्राप्त जानकारी के अनुसार ,प्रसव पीड़ा से त्रस्त रतनपुर गांव निवासी वीरेंद्र शर्मा की 35 वर्षीया पुत्री रसना कुमारी को बुधवार को लेकर पूर्वाहन करीब 10:00 बजे उसके परिजन अनुमंडल अस्पताल पहुंचे। महिला के साथ रहे परिजनों एवं अन्य का कहना है कि महिला अस्पताल में भर्ती हो गई। सब कुछ नॉर्मल था।एक इंजेक्शन देने के बाद प्रसव पीड़ा से त्रस्त महिला को असहनीय दर्द होने लगा और उसके बाद अस्पताल प्रबंधक द्वारा अनुमंडल अस्पताल में ही कार्यरत महिला चिकित्सक डॉ रंजू के निजी अस्पताल में चले जाने को कहा गया। यहां तक कि अस्पताल से एंबुलेंस भी नहीं दिया गया। महिला के साथ रहे लोगों ने अपने स्तर से गाड़ी की व्यवस्था कर बुधवार की रात करीब आठ बजे महिला चिकित्सक के यहां ले गए, जहां 25 हजार रुपया जमा करने की बात कहकर बड़ा ऑपरेशन से एक बच्ची ने जन्म लिया। यहां पर सवाल उठता है कि जब अनुमंडल अस्पताल में चिकित्सुय सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो फिर आखिर इमरजेंसी केस को भी भर्ती क्यों ले लिया जा रहा है। गौरतलब हो कि मानव संसाधन एवं चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में अनुमंडल अस्पताल में सिर्फ ओपीडी ही चलाया जा रहा है ।इसके बाद का प्रकरण और भी आश्चर्यजनक है।प्रसव पीड़ा से त्रस्त महिला ने बड़ा ऑपरेशन के बाद एक बच्ची को जन्म दिया। उसके साथ रहे श श्रीमन नारायण ने बताया कि पहले से ही एक बच्ची उसे थी। जैसे ही महिला के परिजनों को बच्ची जन्म लेने की सूचना मिली तो ऐसा लगा कि उनके ऊपर दुख का पहाड़ टूटने लगा है। सभी रोने लगे ।बहुत समझाने के बावजूद भी उनका दुख कम होता नहीं दिखा।शायद उन्हें बेटे का इंतजार था।तब डिवाइन स्ट्रीम मिशन स्कूल दाउदनगर के निदेशक शंभू शरण सिंह ने तत्काल उस बच्ची को गोद ले लिया और संस्था के नाम पर सारी आर्थिक मदद की पेशकश कर दी ।उन्होंने चिकित्सक के पास ऑपरेशन शुल्क में से पांच हजार रुपया भी जमा कर दिया और बच्ची के जीवन भर सारा खर्च वहन करने की बात कही।इस संबंध में पूछे जाने पर अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ राजेश कुमार सिंह का कहना है कि अनुमंडल अस्पताल से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।बुधवार की रात ड्यूटी में डॉ. सुभाष थे।गर्भवती महिला का अचानक ब्लड प्रेशर हाई हो गया था, जिसके कारण उसे सदर अस्पताल औरंगाबाद रेफर कर दिया गया था ।अस्पताल प्रबंधक द्वारा उन्हें अनौपचारिक सलाह दी गई थी कि औरंगाबाद जाने के क्रम में हुए अनुमंडल अस्पताल में ही कार्यरत महिला चिकित्सक डॉ रंजू से सलाह ले सकते हैं ।अब यदि उनके द्वारा ऑपरेशन कराया गया तो वहां उनका मामला है।इससे अनुमंडल अस्पताल का कोई लेना देना नहीं है।

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