
जिउतिया पर्व को धूमधाम और पूरी ऊर्जा के साथ मनाने के लिये विद्यार्थी चेतना परिषद द्वारा स्थानीय दुर्गा क्लब में कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय बुद्धिजीवियों, कलाकारों, नकल बनाने वाली टीमों एवं प्रतियोगिता का आयोजन करने वाली विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया।इस कार्यशाला में जिउतिया के संदर्भ में चर्चा की गई और इतिहास से लेकर वर्तमान तक के स्थिति के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। शंभू कुमार ने कहा कि इस बैठक का आयोजन एख सप्ताह पूर्व ही किया जाना था ,लेकिन किसी कारणवश उस समय नहीं हो सका। समय कम रहने के कारण सभी कलाकारों को बुलाया नहीं जा सका, लेकिन इसे ध्यान में रखकर अगले वर्ष इस पर विचार किया जाएगा।पूर्व के कलाकारों, वर्तमान कलाकारों एवं बच्चों के कला पर विस्तृत जानकारी दी गई। कहा गया कि आज भी सम्मान के रूप में नकल को देखा जाता है। नकल को सम्मान स्वरूप नगद के रूप में जो राशि मिलता रहा है,उससे लगभग नकल में लगा खर्च भी आ जाता था तथा सड़कों पर भी नकलों का प्रदर्शन किया जाता रहा है।कई पारंपरिक नकल की प्रस्तुति लुप्त हो गई है इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है। कला की प्रस्तुति आज के युग के अनुसार हों। इसके लिये एक मंच बनाने पर बल दिया गया।प्रशिक्षण देने के लिए पर बल दिया गया और कहा गया कि लावणी कला कसेरा टोली तक ही सिमट कर रह गया है जो उनसे सीखने की आवश्यकता है। मुकेश कुमार द्वारा कहा गया कि वर्ष 2017 में नकल प्रतिभागियों के लिए नाश्ता एवं जलपान की व्यवस्था की गई थी ।ऐसी व्यवस्था अन्य लोगों से भी करने का आग्रह किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया की जिउतिया समारोह के प्रशिक्षण के लिये मंच बनाया जाए।प्रतियोगिता कराने वाले सभी मंच इस मंच के सदस्य होंगे। इस बैठक की अध्यक्षता राजेंद्र चौधरी ने की। इस मौके पर श्यामलाल, संदीप कुमार,ममतेश कुमार, प्रशांत कुमार ,बसंत कुमार, राजू भारती ,चंदन कुमार, दीपक कुमार,सोनू ,सौरभ,अमन,
प्रदुमन ,पिंटू, रूपेश सोनी आदि उपस्थित थे।