शहीद भगत सिंह की मनाई गई जयंती।

राहुल कुमार की रिपोर्ट:

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दाउदनगर इकाई द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी की जयंती के अवसर पर अभाविप कार्यालय में पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला गया।
नगर मंत्री रवि यादव ने उनकी वीर गाथा को याद करते हुए बताया कि 28 सितंबर 1907 को जिला लायलपुर (अब पाकिस्तान में) के गांव बावली में जन्मे शहीदे आजम भगत सिंह की आज 111वीं जयंती है। अपने क्रांतिकारी विचारों और कदमों से अंग्रेजी हकूमत की जड़े हिला देने वाले भगत सिंह कहते थे, ‘बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।’ जैसे ही 1922 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन खत्म करने की घोषणा की तो भगत सिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोहभंग हो गया था।
भगत सिंह कहते थे, ‘प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्‍तों को अक्‍सर लोग पागल कहते हैं।’
सुमित भारती ने उनकी जीवनी से प्रेरित होकर उनके द्वारा कहे गए कुछ शब्दों को सभी के बीच रखते हुए कहा कि
” जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधे पर जी जाती है दूसरे के कंधे पर तो जनाजे उठाए जाते हैं”। इस अवसर पर नगर सह मंत्री बबलू जय प्रशांत विकास कुमार सौरभ राजपूत दीपक टाइगर छात्रसंघ कोषाध्यक्ष धीरज कसेरा प्रतिक राज अमन कुमार मंडल रोशन सिंह पप्पू गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

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