दाउदनगर क़िला के सौंदर्यीकरण में काँटा बन रही गंदगी और अंधियारा

ऐतिहासिक धरोहर दाऊद खान का किला पिछले वर्ष से अपनी सौंदर्यीकरण कार्य प्रगति के लिए चर्चे में आया। साफ़-सफ़ाई, बैठने और टहलने की जगह बनी जिसके बाद से क़िला घूमने जाने वालों की संख्या बढ़ती गई। कई क्रिकेट टूर्नामेंट हुए तो उत्सवी रंग में भी क़िला को सजाया गया। प्रभात ख़बर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पुरातत्व विभाग की देख-रेख में क़िला को रखा गया है।

शौक़ या मजबूरी?

इतना सबकुछ अच्छा सा हो रहा है परन्तु हम में से कुछ इस ऐतिहासिक धरोहर को इस लायक नहीं समझ पा रहे हैं। देखने को ये मिल रहा है कि क़िला परिसर में फिर से गंदगी फैलाई जा रही है। कचरा फेकने के साथ साथ शौच भी किया जा रहा है जो कि काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। अब ऐसी तुच्छ हरकत करने वालों के लिए ये शौक़ की बात है या फिर मजबूरी? केन्द्र सरकार द्वारा हर घर शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है उसके बावजूद कुछ लोगों की मानसिकता इतनी गन्दी हो गई है कि वे किला को ही शौचालय बना लिए हैं। जिससे सुबह शाम क़िला का सैर करने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

शौचालय बन कर तैयार पर चालू नहीं:

ज्ञात जानकारी के मुताबिक़ क़िला परिसर में शौचालय बनकर तैयार है। पानी की टंकी की भी व्यवस्था हो चुकी है। लेकिन क़िला परिसर में बिजली की कमी होने के कारण शायद शौचालय को चालू नहीं किया जा सका है। क़िला घूमने आए लोग भी शौच लगने पर क़िला के अंदर बने अस्तबल रूपी घर को शौचालय बना लेते हैं। शौच आना तो स्वाभाविक क्रिया है जिसके कारण मजबूरी बन जाती है। अपने शहर में क़िला तो क्या कहीं भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है जिसका इस्तेमाल ऐसे समय पर किया जाए।

पेयजल की नहीं है व्यवस्था:

लोगों का क़िला परिसर में आना तो नित्य लगा ही रहता है, साथ ही बच्चों और युवाओं का खेलना कूदना। भारी संख्या में लोगों के आवागमन के बावजूद यहाँ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। अगर तत्काल एक चापाकल(हैंड पम्प) की व्यवस्था भी हो जाए तो पर्यटकों को राहत मिलेगी।

अंधियारा एक अलग समस्या:

किला परिसर में हर जगह बिजली का खम्भा व बल्ब लगा दी गई है लेकिन ये सिर्फ शोभा की वस्तु बनी हुई है। शाम होते ही अंधियारा छा जाता है क़िला परिसर में। ठण्ड का मौसम आने से शाम में जल्दी अँधेरा हो जाएगा। जल्द से जल्द अगर बिजली की व्यवस्था कर दी जाए तो अँधियारे और शौचालय की समस्या से कुछ तो राहत मिलेगी। अँधियारे का फ़ायदा उठा कर शाम में जो लोग क़िला में शौच करते होंगे या कचरा फेंकते होंगे उनसे भी बहुत हद तक निजात मिलेगी।

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