
प्रेमचंद जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन
देव कुल सामाजिक विकास संस्थान देवदत्त पुर में उपन्यास सम्राट एवं कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया
विचार गोष्ठी की शुरुआत करते हुए देवकुल सामाजिक विकास संस्था के संस्थापक शिक्षक गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम ने कलम के सिपाही प्रेमचंद के जीवनी पर रोशनी डालते हुए बताया कि वर्तमान दौर में भी प्रेमचंद के बताए गए रास्ते प्रासंगिक बने हुए हैं दुनिया को आज प्रेमचंद को अनुकरण करना चाहिए और उनके संघर्ष से सीखना चाहिए जिस तरह से आभाव में अपने लेखनी के बल पर दुनिया में पहचान बनाया ऐसा उदाहरण विरले ही मिलता है मुंशी प्रेमचंद ने अपने शुरुआती दिनों में एक सरकारी शिक्षक के रूप में कार्य की शुरुआत की थी और आगे चलकर उन्होंने हंस नामक पत्रिका निकाली जिससे उनकी पहचान साहित्य जगत में बनने लगा मुंशी प्रेमचंद का प्रारंभिक नाम धनपतराय था जबकि शुरू के दिनों में नवाब राय के रूप में लेखन की शुरुआत की धनपतराय से प्रेमचंद तक का उनका सफर बहुत ही रोचक था प्रेमचंद्र जीवनभर गरीब दबे कुचले और ग्रामीण लोगों की आवाज को मुखरित करते रहे साथ ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी अपने ढंग से सहयोग किया था
विचार गोष्ठी में विचार रखते हुए सुप्रिया गौतम ने उनके द्वारा लिखे गए कहानियों पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में 300 से अधिक कहानियां 18 उपन्यास कई नाटक निबंध और जीवन चरित्र भी लिखें उनके प्रमुख कृतियों में गोदान गबन सेवासदन निर्मला कर्मभूमि प्रतिज्ञा रंगभूमी आदि प्रमुख उपन्यास थे वही कफन शतरंज के खिलाड़ी पूस की रात ईदगाह बड़े घर की बेटी पंच परमेश्वर आदि प्रमुख कहानी थे वही कहानी संग्रह के रूप में उन्होंने मानसरोवर का संपादन किया इसके अलावा उन्होंने नाटक संग्राम कर्बला रूठी रानी प्रेम बेदी आदि लिखें साथ ही उन्होंने निबंध और जीवन चरित्र भी लिखा था इस विचार गोष्ठी में निशा कुमारी सानिया परवीन गुलाबशा प्रवीण शगुफ्ता परवीन सानिया कुमारी ललिता कुमारी रूबी कुमारी मूरत कुमारी झुन्नी कुमारी पूनम कुमारी सुधा कुमारी राज रतन साव मोहम्मद ताबिश हुसैन अंबर भरत कुमार शबनम परवीन सिमरन परवीन किरण कुमारी वंशिका कुमारी काजल कुमारी गजाला परवीन चांदनी कुमारी अनु कुमारी इत्यादि लोगों ने हिस्सा लिया.