
शाहिद क़य्यूम की रिपोर्ट:-
कल दिनांक 30 मार्च 2018 को रात्रि 8 बजे से दाऊदनगर के छत्तर दरवाज़ा स्थित मदरसा इस्लाहिया दाउदनगर में जलशा-ए-दस्तार बंदी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें मदरसा से क़ुरान की मुक़म्मल हिफ़्ज़ (कंठस्थ) कर हाफ़िज़ बने सभी बच्चों को दस्तार बंदी (माथे पर पगड़ी भेंट) की गई। जिनमें से सैफुल्लाह नाम का एक सात साल का नन्हा बच्चा जो क़ुरान की मुकम्मल हिफ़्ज़ कर हाफ़िज़ बना लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं लग रहा था। प्रोग्राम में उपस्थित सभी लोगों ने इस बच्चे की उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामना दिए।
अशरफ़ी प्रवीण जो एक लड़की होकर क़ुरान की मुक़म्मल हिफ़्ज़ कर हाफ़िजा बनी। ऐसा बहुत ही कम सुनने या देखने को मिलता है कि हमारे समाज में लड़कियां भी हाफ़िजा हो। उनके माता-पिता की सराहना की जो अपनी बच्ची को हाफ़िजा बनाकर दिखा दिए की लड़की भी लड़कों से कम नहीं होंती।
जलशा में आये धर्मगुरुओं ने क़ुरान और इस्लाम की हकीक़त को लोगों के सामने रखा। ईस्लाम शांति का मजहब है न की अशांति का। इस्लाम वो है जो अपने पड़ोसियों को भूखे सोने की इजाज़त नहीं देता, जो ईस्लाम बेवजह पानी बहाने की इजाज़त नहीं देता वो किसी बेगुनाह का क़त्ल करने का इजाजत कैसे दे सकता है। इस्लाम की शिक्षा ये भी है कि जिसने किसी एक बेगुनाह इंसान को मारा गया उसने पूरी इंसानियत का हत्यारा होगा, और जिसने किसी एक बेगुनाह को बचाया गोया उसने पूरी इंसानियत को बचाया चाहे वो किसी भी मज़हब का हो।
कोई भी मज़हब नफ़रत फ़ैलाने की इजाज़त नहीं देता बल्कि मजहब तो इंसानियत को बचाने का नाम है। नफरत से किसी का भला नहीं होता, गन्दी सियासत करने वाले अपनी कुर्सी की लोभ में बेगुनाहों का कत्ल करवाते हैं।
मौके पर मदरसा के अध्यक्ष हजरत मौलाना मुस्ताक साहब, हाजी सब्बीर अंसारी, मौलाना जहांगीर साहब, हाफ़िज अनवर साहब, इमरान अंसारी, आरिफ़ अंसारी व अन्य मौजूद थे।