
दाउदनगर अनुमंडल कार्यालय परिसर में
जिला विधिक सेवा प्राधिकार औरंगाबाद के तत्वाधान में भरण पोषण का अधिकार के तहत माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विधिक सेवा केंद्र का शुभारम्भ किया गया।जिसका उद्घाटन जिला एवं सत्र बलराम दुबे ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने एसडीओ अनीस अख्तर को वरिष्ठ नागरिकों व माता-पिता से जुड़े मामलों में अधिकार व दायित्वों से अवगत कराते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों एवं माता-पिता से जुड़े मामलों में जितना अधिकार एसडीओ को दिया गया है, उतना किसी को नहीं मिला है ।उन्होंने कहा कि अगर कोई भी संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करता है तो एसडीओ कोर्ट द्वारा तीन माह की सजा देने का प्रावधान है। विधिक सेवा केंद्र के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा करने का एक सशक्त माध्यम है । पीड़ीतों को आसानी से और सुलभ न्याय मिलेगा । बुजुर्गों को मान सम्मान मिलेगा और परिवार में सुख शांति बनी रहेगी।इस दौरान भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं की जानकारी भी दी गई ।उन्होंने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को कहा कि वरिष्ठ नागरिकों व माता-पिता की प्रताड़ना से संबंधित पहुंचने वाले मामलों को अब विधिक सेवा केंद्र में भेजें। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस केंद्र में पीएलभी के रूप में ज्ञानदत्त कुमार एवं प्रेम कुमारी सिन्हा को तैनात किया गया है। इस मौके पर सीजेएम संतोष कुमार पांडेय, सब जज वन अनिल कुमार मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव निशिकांत ठाकुर अनुमंडल पदाधिकारी अनीस अख्तर, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा विधि संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता, सचिव बैजनाथ प्रसाद ,अधिवक्ता उमेश सिंह शशि भूषण सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सत्येंद्र कुमार समेत हरिनाथ सिंह समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। उद्घाटन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दुबे ने अनुमंडल व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण एवं अवलोकन किया।इसके बाद विधि संघ के पुस्तकालय कक्ष में विधि संघ द्वारा उनका स्वागत किया गया। विधि संघ के अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों व समस्याओं से उनके सामने रखा।