
इस साल आम के पेड़ों पर आए जबरदस्त मंजर देख कर दाउदनगर क्षेत्र के आम उत्पादक किसानों के साथ साथ सामान्य जन भी बहुत गदगद नजर आ रहे हैं एक ओर आम उत्पादकों इस वर्ष आम की जोरदार उपज होने की आशा है जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होगी दूसरी ओर है सामान्य लोगों को मुंह की मिठास कम कीमतों पर देसी आम से होने की उम्मीद है अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष लोगों के रसोई आम की सुगंध से महक उठेगा.
भूगोल शिक्षक गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम बताते हैं वैसे तो भारत के अनेक हिस्सों में आम का उत्पादन होता है दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में आम की फसल जल्दी तैयार हो जाते हैं परंतु उन फलों में बिहारी मिट्टी की सुगंध सुबास और सोंधाई नहीं होती है वह मात्र खट्टे-मीठे स्वाद की तृप्ति देने तक ही सीमित रह जाते हैं बिहार के दूधिया मालदह की बेमिसाल सुगंध सोंधाई और मिठास विदेशों में आकर्षण का एक केंद्र बिंदु बनती है यही कारण है कि हमारे राज्य के मालदा आम की मांग विदेशों में बहुत अधिक है और इसका बड़े पैमाने पर निर्यात होता है
शिक्षक गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम बताते हैं की आम उत्पादकों को जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाए तब पौधों की सिंचाई कर देनी चाहिए तथा आम के मंजर को मछुआ कीट एवं रोमिला रोग से बचाव तथा छोटे फलों को झड़ने से रोकने के लिए आम के पौधों पर कीटनाशी फफूंदनाशी तथा हार्मोन मिक्सचर का छिड़काव करना चाहिए.
आम के एक सामान्य पौधे की वार्षिक उपज 300 से 350 किलोग्राम होती है आम के अधिकांश पौधे 1 साल के अंतराल पर अधिक फल और उपज देते हैं. कुछ प्रजातियों में प्रत्येक साल फल लगता है।
