
24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का दीप यज्ञ का विहंगम दृश्य बड़ा ही मनमोहक और प्रेरणादायी रहा।पूरे पचकठवा गायत्री मंदिर और देवी मंदिर हजारो जलते हुए दीपको से शुशोभित रहा। शान्तिकुंज से पधारे गायत्री टोली के द्वारा गीत संगीत के माध्यम से दीपयज्ञ की महत्व को बताया।आचार्य नरेंद्र विद्यार्थी ने बताया कि मानव जीवन को सबसे ज्यादा समझदार लोग ही बिगाड़ रहे है।लडकिया फैशन में, लड़के व्यशन में और माँ बाप टेंशन में।इसी बिगड़ी हुई भारतीय संस्कृति को सुधारना ही हमारे परम् पूज्य गुरुदेव पंडित श्री राम शर्मा जी का उद्देश्य है।आज कल किसी भी स्कूल में यह नही सिखाया जाता कि क से कर्म , कर्तब्य भी होता है, ग से गंगा, गीता ,गौ और गायत्री होता है, किसी भी स्कूल में यह नही सिखाया जाता कि स से सत्य, सत्कर्म, संयम और सद्गुम भी होता है। बल्कि यह सिखया जाता कि क से कबूतर ,ग से गधा और स से साँप सिखया जाता है, अगर वह सब सिखाया जाता तो कभी भो आज की युवा पीढ़ी अपने सत्कर्म के मार्ग को न भूलती , अपने माँ बाप के प्रति कर्तब्य को ना भूलती।शांतिकुंज से आई टोली के विद्वानों ने प्रज्ञा अभियान के लिए युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रयासों की चर्चा की। साथ ही कहा कि अखंड ज्योति पत्रिका गुरुदेव का संदेश है, जिसे सभी को पढना पढाना चाहिए। यज्ञ के दौरान गायत्री मंदिर के पास लगी पुस्तक प्रदर्शनी में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की अनेक पुस्तकें भी लोगों ने लीं।

दीपयज्ञ के बाद अंतिम छणों में 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के आयोजक श्री ललन जी के द्वारा सभी टोलियो की भावभीनी विदाई दी गई। मंच पर गायत्री परिवार की बिंदु बहन, लीलावती बहन, शीला बहन, अंजू बहन, मंजू बहन,सुरेश जी, वकील साहब, बलदेव जी, शिव शंकर प्रसाद और गौतम जी उपस्थित रहे। दीपयज्ञ के बाद हजारो श्रद्धलुओं ने महाप्रसाद को भी श्रद्धा पूर्वक ग्रहण किया।

yuva pidhi ke hi kandhon par desh ka bhavishya hai.agar we satkarm chhor denge to desh me ashuron ka raj ho jayega,aise satkarmiyon ko dhanyavad !!!