सरकारी और निजी विद्यालयों के शिक्षकों का प्रशिक्षण एक साथ किसी भी तरह से सही नही:-गोप गुट

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ गोप गुट प्रवक्ता गोपेंद्र कुमार सिन्हा ने एक प्रेस विज्ञापित की है कि बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ”गोप गुट”राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान(एनआईओएस)से मांग करती है कि अप्रशिक्षित शिक्षकों को डीएलएड प्रशिक्षण के नाम पर मानसिक प्रताड़ना बंद करें.सरकारी विद्यालयों में सेवारत अप्रशिक्षित शिक्षकों एवं निजी विद्यालयों में सेवारत शिक्षकों का प्रशिक्षण अलग-अलग केंद्रों पर किया जाए.सरकारी और निजी विद्यालयों के शिक्षकों का प्रशिक्षण एक साथ किसी भी तरह से सही नहीं होगा.बिना किसी पूर्व सूचना के शिक्षकों के प्रशिक्षण केंद्र में बदलाव दुर्भाग्यपूर्ण है.अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण केंद्र उनके विद्यालय के नजदीक के केंद्र पर स्थापित किया जाए.बहुत सारे प्रशिक्षु शिक्षकों का अध्ययन केंद्र उनके विद्यालय से 30 से 40 किलोमीटर दूरी पर बनाया गया है,जबकि एनआईओएस को यह पूरी तरह से मालूम है कि यह प्रशिक्षण शनिवार और रविवार के दिन होना है,शनिवार को प्रशिक्षण का समय दोपहर 2:00 बजे से निर्धारित है,क्या शिक्षक सुदूरवर्ती गांव स्थित विद्यालयों से 1:30 बजे तक शिक्षण कार्य करके 40 किलोमीटर दूर अपने प्रशिक्षण स्थल पर निर्धारित समय पर पहुंच जाएंगे.NIOS द्वारा प्रशिक्षण केंद्र निर्धारण में ना तो शिक्षिकाओं का और ना हीे दिव्यांग शिक्षकों का ख्याल रखा गया है.प्रशिक्षण की तिथि का निर्धारण यथाशीघ्र किया जाए,जिससे कि शिक्षकों को परेशानी ना हो.प्रशिक्षण संबंधी सारी जानकारी शिक्षकों के रिफरेंस नंबर पर दिया जाना चाहिए जिससे कि वे सही समय अपने प्रशिक्षण केंद्र पर पहुंच सकें.
अगर ऐसा ना हो तो जिला शिक्षा पदाधिकारी से आग्रह है कि प्रशिक्षु शिक्षकों को शनिवार के दिन प्रशिक्षण के लिए शैक्षणिक अवकाश दिया जाये,जिससे प्रशिक्षु शिक्षक शिक्षिकाएं भागदौड़ से बचें और समय पर प्रशिक्षण में हिस्सा ले सकें.आए दिन इस भाग दौड़ में कई शिक्षक-शिक्षिकाएं दुर्घटना के शिकार हो गए हैं. साथ ही साथ जिला शिक्षा पदाधिकारी का ध्यान सातवें वेतन आयोग के आलोक में शिक्षकों के सर्विस बुक अद्यतन करने एवं पे फिक्सेशन के निर्धारण मे हो रही देरी की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं.जितना जल्द हो सके शिक्षकों का सर्विस बुक निर्धारण बीआरसी स्तर पर कैंप लगाकर किया जाए जिससे किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की संभावना को रोका जा सके.

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