
पिंटू कुमार आर्य की रिपोर्ट:-
राजनीतिक हेर फेर में फंसा दाउदनगर का अनुमंडलीय अस्पताल साल 2004-5 में भूमि पूजन होकर 2015 में बन बन कर तैयार हुआ जो अनुमंडलीय अस्पताल आज भी अपने दिन के नाम पर रों रह है। यह अस्पताल स्वस्थ बिभाग के मद से पास हुआ जिसकी लागत राशि लगभग 6 करोड़ रुपये थी ओर इस अस्पताल का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री बिहार के जीतन राम मांझी के द्वारा किया गया था।इस अस्पताल से नगर वासियों को ही नही बल्कि पूरे अनुमंडलीय क्षेत्र के लोगो की उम्मीदे टिकी हुई थी।लेकिन सायद अनुमंडलीय अस्पताल के नसीब कुछ और ही थी जिससे सिर्फ और सिर्फ आज भी लोगो को निराश ही हाथ लग रही है।क्योंकि अनुमंडलीय अस्पताल का उद्घाटन तो साल 2015 में धरातल पर हो गई लेकिन कागजी करवाई आज भी फसा हुआ है और इसका उद्घाटन कागज पर नही हो सकी जिससे अनुमंडलीय अस्पताल को आज बि कोई मद उपलब्ध नही हो पाता है।जिससे अस्पताल कर्मियों में भी निराशा दिखाई देती है ओर कर्मी बदहाल दिखाई देते है साथ ही साथ यह अस्पताल अस्पताल तो है लेकिन सिर्फ नाम के क्योंकि कभी आपको डॉक्टर मिलेंगे तो मरीज नही ओर मरीज मिलेंगे तो डॉक्टर नही क्योंकि यहा कि हाल खस्ताहाल है क्योंकि यहाँ कोई मद नही है तो न तो दवा है नही उचित बेवस्था

कहते है एक्यूप्रेशर चिक्तिशक डॉ विकास मिश्र
जब एक्यूप्रेशर चिक्तिशक डॉ बिकाश मिश्र से इस मुद्दे पर बात किया तो उन्होंने कहा कि सरकार चाहे कोई भी हो उनकी अधिकतर काम कागजो पर ही उद्घाटन हो जाता है लेकिन दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल इससे कुछ अलग ही स्थिति में है क्योंकि इसका उद्घाटन धरातल पर है लेकिन कागजो पर नही।
वैसे इस अस्पताल का जीर्णोद्धार हो जाये तो यह अस्पताल औरंगाबाद के सदर अस्पताल से बेहतर होगा।जरूरत है तो तो सिर्फ इस पर ध्यान देने की।
इस मुद्दे पर स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों से बात करने पर कर्मियों ने कहा कि मजबूरी है कि हमलोग कुछ समय यह तो कुछ समय वहाँ समय देते है क्योंकि हमलोग को दोनो जगह देखना पड़ता है तो अगर हम सब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रहे तो अनुमंडलीय अस्पताल छूट जाएगा और अनुमंडलीय अस्पताल अगर जतई है तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छूट जाता है क्योंकि दोनों अस्पतालों को एक टाइम में देख पाना सम्भव नही है।जिससे मरीजो को थोड़ी परेशानी होती है
विदित हो कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अनुमंडलीय अस्पताल की दूरी लगभग 5 किलो मीटर की है।और ऐसे में एक ही टाइम में दोनों जगह पर एक ही कर्मी को उओलब्ध होना सम्भव नही है।जबकि अनुमंडलीय अस्पताल जाने के लिए रास्ता भी ठीक ठाक नही है
इस मुद्दे को स्थानीय स्वतदाताओ के द्वारा समय समय पर उठाते रहा गया है