शौच करनेवाले को रोकना कौन सा शैक्षणिक कार्य? – सुनील बॉबी

खुले में शौच की निगरानी शिक्षकों के द्वारा कराए जाने के सरकारी फरमान से शिक्षक संघ नाराज है। इस सरकारी फरमान को शिक्षक नेताओं ने तुगलकी फरमान करार दिया है।शिक्षक संघ किसी भी कीमत पर इस आदेश को मानने के लिए तैयार नहीं है और कड़ा ऐतराज़ जताया है। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विजय कुमार सिंह एवं जिला मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बॉबी ने कहा कि सरकार शीघ्र ही इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लेती है तो संघ इसके विरोध में न्यायालय में याचिका दायर कर सड़क पर आंदोलन करने को बाध्य हो जायेगा। वही प्रखंड अध्यक्ष अविनाशचंद्र राय, बिट्टू सिंह, अमरेंद्र यादव व संजय कुमार ने कहा कि सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए तरह -तरह के हथकंडे अपना रही है ।उन्होंने कहा कि आरटीआई के प्रावधानों के अनुसार शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाना है । श्री बॉबी ने सरकार से पूछा है की शौच जाने वाले को रोकना कौन सा शैक्षणिक कार्य है।उन्होंने यह भी कहा कि शौच बाहर जाना लोगो का शौक नही है बल्कि मजबूरी है । उन्होंने कहा कि खुले में शौचमुक्त राज्य घोषित कराकर अपनी पीठ थपथपाने की मंशा रखने वाली सरकार सूबे के आईएएस अधिकारी, विधायकों और सांसदों के साथ जनप्रतिनिधियों को इस कार्य में क्यों नहीं लगाना चाहती। उन्होंने कहा कि शौच करने वाली महिलाओं की फोटो खींचने पर शिक्षकों की हत्या भी हो सकती है। इसका जिम्मेवार कौन होगा। शिक्षक स्वच्छता अभियान का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं लेकिन सरकार शिक्षकों के प्रति गंदी सोच रखती है। गरीब लोगों की मजबूरी का भी मजाक उड़ा रही है। सरकार के इस फरमान का विरोध अनिल कुमार सिंह, राकेश सानू, आलमगीर अख्तर, शम्भु प्रसाद बारी, चंदा सिंह, तब्बसुम प्रवीण, रवि शर्मा, कपिल कुमार, विश्वजीत कुमार सिंह, श्याम नन्दन प्रसाद शर्मा, धीरज कुमार सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों ने किया है।

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