शिक्षकों के ऊपर तानाशाही रवैय्ये से शिक्षक संघ बेहद नाराज़

प्राथमिक शिक्षक संघ गोप गुट दाऊदनगर के प्रवक्ता गोपेन्द्र कुमार सिन्हा गौतम ने शिक्षकों को खुले मे शौच करने वालों को रोकने लिये डयूटी लगाने की सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुये सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मॉग की है। यह पदाधिकारियों की शिक्षक के प्रति पुर्वाग्रह व गलत मानसिकता तथा सरकारी शिक्षा व्यवस्था को रसातल मे पहुंचाने का नीति हैं। जिसे शिक्षक समुदाय किसी भी कीमत पर नही मानेगा। अगर सरकार इसी तरह से शिक्षकों के मान सम्मान का मान मर्दन करती रहेगी तो शिक्षक अपने संवैधानिक अधिकार व सम्मान के रक्षा के लिये व्यापक आंदोलन छेड देंगे। जिन शिक्षकों को पहले से ही सतरह प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्य करने पडते है उसके ऊपर सामाजिक दायित्व के बहाने एक और गैर शैक्षणिक कार्य की जिम्मेवारी लादना कहॉ से न्यायसंगत है। संघ सरकार से पहले यह बात बताने की माँग की है कि आखिर किसके निर्णय के आलोक मे स्थानीय पदाधिकारीयों ने शिक्षकों को इस कार्य मे लगाने का तानाशाही फरमान जारी किया? हमारी संघ सरकार से माँग करती है कि अगर यह सरकार का निर्णय नही है तो इस तरह के गैर जिम्मेवार पदाधिकारीयों पर सरकार अब तक कोई कारवाई क्यों नही की? जिनके कारण बेवजह सरकार व शिक्षकों को बदनामी झेलनी पड रही है। हम शिक्षक लोग तो खुद ही हमेशा से बच्चों व समाज को स्वच्छता के बारे शिक्षित करते रहते है, फिर भी हमारे ऊपर ये दबाव की राजनीति क्यों कर रही है सरकार? एक तरफ शिक्षकों के हाथ कलम के जगह कलछुल पकडवाने का कार्य सरकार करती रही है अब कुदाल पकडवाना चाहती है, दूसरी ओर बच्चों के अपेक्षित परिणाम नही आने पर शिक्षकों पर ही कारवाई करती है ये दोमुही नीति नही चलेगी। सरकार अगर बिहार को शैक्षिणिक दृष्टि से अव्वल बनाना चाहती है तो शिक्षकों से गैर शैक्षिणिक कार्य करवाना तुरंत प्रभाव से बंद करे। शिक्षकों को वर्गकक्ष मे रहने दे न कि गलियों और सडकों के खाक छानने को मजबुर करे।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.