नियोजित संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने की चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा

बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मी संघ के आह्वान पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियोजित संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की थी. राज्यव्यापी आंदोलन के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति से लेकर प्रखंड प्रबंधन इकाइयों में संविदा के आधार पर कार्यरत कर्मियों ने आज काली पट्टी लगाकर विरोध प्रदर्शन किया तथा अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की. जिला अंतर्गत जिला स्वास्थ्य समिति से लेकर प्रखंड प्रबंधन इकाइयों में प्रबंध प्रबंधकीय पदों पर नियोजित कर्मियों के साथ साथ सामान्य एमबीबीएस चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, टीवी कंट्रोल कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत प्रयोगशाला प्रावैधिक, एसटीएस, प्रयोगशाला पर्यवेक्षक, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत आयुष चिकित्सक, नर्स, फार्मासिस्ट, कार्यालय सहायक, डाटा ऑपरेटर सहित अन्य विभिन्न पदों पर कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने काली पट्टी लगाकर कार्य किया. 
जिला सचिव नागेंद्र कुमार केसरी ने बताया कि जिला शाखा औरंगाबाद के सम्मानित अध्यक्ष डॉ कुमार मनोज के नेतृत्व में जिले के सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग प्रशंसनीय रहा है. 
इस विरोध प्रदर्शन में टीवी कंट्रोल एंप्लाइज एसोसिएशन बिहार एवं आमसा का भरपूर समर्थन प्राप्त हो रहा है. आंदोलन का स्वरूप राज्यव्यापी एवं सफल रहा है. सरकार अगर हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है तो का असर गंभीर होगा. आंदोलन के अंग्रेज अगले चरण में धरना प्रदर्शन तत्पश्चात सामूहिक हड़ताल पर जाने की योजना है.
ज्ञात हो कि कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राज्य से प्रखंड स्तर तक स्थापित कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों तथा स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रबंधक एवं अन्य विभिन्न पद धारकों की लगन से किए गए कार्यों के वजह से स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक परिवर्तन आया है. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, प्रजनन दर, स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं स्वास्थ्य संस्थानों के रख-रखाव मै सुधार हेतु किया गया कार्य उल्लेखनीय है. इसके बावजूद कि आगे और कार्य किया जाना अपेक्षित है तथा कार्मिकों की आवश्यकता है फिर भी सरकार द्वारा संविदा गत नियोजित कार्मिकों  के कल्याण हेतु कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस से संविदा कर्मियों के बीच असंतोष एवं भविष्य को लेकर डर बना हुआ है.
 इस क्रम में संघ के जिला समन्वयक विकास शंकर ने बताया कि संघ की मांगे औचित्यपूर्ण हैं क्योंकि व्यवस्था में संविदा आधारित नियोजित कार्मिकों से स्थाई कार्मिकों की तरह सभी प्रकार के कार्य कराए जा रहे हैं तथा सुविधा देने में भेदभाव बढ़ता जा रहा है.  संविदा गत कार्यरत कार्मिकों को काफी कम मानदेय मिलता है, पिछले 10 वर्षों से  सेवारत हैं किंतु प्रतिवर्ष संविदा नवीनीकरण का तनाव रहता है. किसी प्रकार के जोखिम की स्थिति में अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा, अंशदान, आश्रितों के लिए अनुग्रह राशि का कोई प्रावधान नहीं है. सरकारी उदासीनता का यह आलम है कि संविदा गत सेवारत कार्मिकों के लिए किसी प्रकार के मानव संसाधन की नीति नहीं बनाई गई है. समान काम के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, कुशल कामगारों के लिए यथोचित रोजगार की नीतियां सरकारी जुमला मात्र साबित हो रही हैं. 
जिला शाखा औरंगाबाद के उपाध्यक्ष  डॉ. विकास रंजन ने बताया कि संविदा कर्मी रोजगार की अनिश्चितता पारिवारिक जिम्मेदारियों और अत्यधिक कार्यभार को लेकर हमेशा तनाव में रहते हैं सरकार इन के कल्याण के लिए  उदासीन है. इस दर्द का एहसास तब अधिक होता है जब संविदा के आधार पर ही चयनित कुछ कार्मिकों का स्थाई नियोजन हो जाता है तथा मानदेय में संतोषजनक वृद्धि की जाती है. हम उम्र के उस पड़ाव पर आ पहुंचे हैं नए तरीके से रोजगार के बारे में सोचना जोखिमपूर्ण है. लंबे समय से हम इस उम्मीद के साथ कार्य कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में सरकार हमारी समस्याओं पर विचार करेगी किंतु कहां कुछ हो रहा है. नतीजतन संगठित आंदोलन के माध्यम से अपनी बातों को सरकार तक पहुंचाना तथा अपने लिए नीतियों का निर्माण कराना ही हमारा उद्देश्य है. हम पुनः आशान्वित हैं कि सरकार हमारी मांगों पर विचार करेगी हमारा भी आत्म सम्मान बढ़ेगा तथा हमारे घर में भी खुशियां आएंगी.
दीपक कुमार, मीडिया प्रभारी, जिला शाखा औरंगाबाद द्वारा बताया गया कि हम राज्य स्तरीय संघ के दिशा निर्देश में जिला अंतर्गत आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध  हैं. आज से लेकर 25 नवंबर तक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के रूप में  काली पट्टी लगाकर सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मी कार्य करेंगे. अगर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जाती है तो दिनांक 28. 11. 2017 को जिला मुख्यालय के समक्ष सामूहिक धरना दिया जाएगा तथा तब भी अगर सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है तो दिनांक 04.12. 2017 से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है.

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