
प्रिंस राज,एसपीजी(सपेशल प्रोटेक्शन ग्रुप)
बहुप्रतीक्षित सोन नदी पर बनने वाले जीवनदायी पुल पर बात करना चाहूँगा मैं भी, एक नागरिक होने की हैसियत से। गलियारों में उसके नामकरण करने की चर्चा चल पड़ी है। तथाकथित समाज के ठेकेदारों को उसके नामकरण करने की अत्यधिक चिंता होने लगी है। मेरा मत है कि- उक्त पुल का नामकरण किसी राजनैतिक व्यक्तित्व के नाम पर बिलकुल भी नहीं होना चाहिए। बिलकुल भी नहीं।मुझे मेरा बचपन से लेकर आजतक का दौर अच्छी तरह से याद है। मैं उसी दाउदनगर का निवासी हूँ जहां के अधिकांश हिस्सों में बरसात के दिनों में चलना मुश्किल हो जाता है। दाउदनगर वासी आज भी निर्वाध बिजली सप्लाई हेतु तरसते हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवा जहां आज भी एक दूर की कौड़ी बनी हुयी है। जहाँ का प्रसिद्ध बर्तन उद्योग, संरक्षण के अभाव में दम तोड़ चूका है। यहां पर बुनियादी विकास का घोर अभाव है। बिजली के बेतरतीब तारों के मकड़जाल में पूरा शहर उलझा पड़ा है।
अव्यवस्था का जिक्र अगर करने लगा जाये तो कलम की स्याही का अभाव हो जायेगा। मन व्यथित और भावुक हो जायेगा। और यह सब होगा भोली- भाली जनता को ठगने वाले राजनैतिक रहनुमाओं के मेहरबानी के वजह से, जिन्होंने शहर को सिर्फ और सिर्फ इस्तेमाल भर किया है। आजादी के बाद अगर एक भी नेता ने जनता के दिल पर छाप छोड़ा होता, तो बात दीगर होती। हमारे नेता गण आज भी शहर की गलियों और नालियों के उद्धार करने में जूट रखे हैं। अपना-अपना कार्यकाल पूरा कर अपनी-अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं।
कहना यह है कि या तो नामकरण न हो, या फिर हो तो किसी शहीद के नाम पर हो। अब पत्रकरों की ड्यूटी बनती है कि शहीदों का पता आंकड़ों से लगवाएं।
Ji Bilkul Jisne Desh, prades ke name pe aapna khoon bahaya usi ka Naam pe hona chahiye.
Jai Hind
Jai Bhart