
नोटबंदी को एक साल पूरे होने पर जहां केंद्र की सरकार नोटबंदी को सफल करार दी है, वही विपक्ष के लोगों का कहना है कि नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है.
राजद (आपदा प्रकोष्ठ) के प्रदेश उपाध्यक्ष सह वरीय नेता डॉ प्रकाश चंद्रा ने नोटबंदी को 1 साल पूरे होने पर महज इसे गरीबों के साथ छलावा करने का बात कही है. श्री चंद्रा ने कहा कि नोटबंदी को केंद्र सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है वही अर्थव्यवस्था पर देश के लोगों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा. सिर्फ प्रचार के माध्यम से सरकार जनता को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और काला धन बाहर आ गया है. जबकि स्थितियां यहां इसके ठीक उलट है. नोटबंदी से भारतीय बाजार मंदी का मार झेल रहा है, लोगों के रोजगार नहीं वही अर्थव्यवस्था की चाल सुस्त है. जहां रियल एस्टेट का कारोबार ठप है, सब्जी से लेकर गरीबों के उपयोग में आने वाली सभी सामान महंगे हो गए और उस पर रही- सही कसर जीएसटी ने पूरा कर दिया. जहां जीएसटी को “एक देश एक कर” के नाम पर लाया गया और जनता में कर सुधार के नाम पर भ्रम फैलाया गया, व्यापारियों को बाजार में सिर्फ मंदी दिखी. असल भार तो आम जनों पर पड़ा.
जहां सोना की खरीद पर 3% जीएसटी लगाया गया वही आम उपयोग की चीजों पर 18 से 28 प्रतिशत भारी-भरकम कर लगाया गया.
पेट्रोलियम उत्पाद को जीएसटी के दायरे से बाहर रखकर जनता को विश्व के बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों के कच्चे पदार्थों की कीमतों में भारी कमी का लाभ जनता को नहीं मिल पाया. क्योंकि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रख कर इसने 28 प्रतिसत से भी ज्यादा टैक्स लगाकर जनता के साथ धोखाधड़ी की गई. बाजार से टैक्स के रूप में पैसे तो वसूले जा रहे हैं, सरकार का खजाना पैसों से भरा पड़ा है. फिर भी विकास कहीं नहीं दिख रहा है और जनता महंगाई के बाहर से ही दबी पड़ी है. इसलिए नोटबंदी और जीएसटी दोनों जनता के लिए छलावा साबित हुआ है. सिर्फ सोशल मीडिया और सरकार के विभिन्न प्रचार के माध्यमों के द्वारा ही जनता को यह बताया जा रहा है कि विकास हो रहा है पर जनता को विकास महसूस नहीं हो रहा है. वर्तमान अर्थव्यवस्था पूंजीपतियों को मजबूत करने वाली एवं मध्यम वर्ग गरीब तबके के लोगों कमर तोड़ने वाली है.