
तेज बुखार व मस्तिष्क ज्वर के रोगी को प्राथमिक उपचार के तौर पर ताजे पानी की पट्टी देना चाहिए और रोगी को अतिशीध्र निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए,जिससे रोगी की जान बचायी जा सके यदि आपके गाँव,शहर,समाज,घर व परिवार में किसी भी बच्चे को तेज बुखार हो तो उसे कभी भी नजर अंदाज व अनदेखा नहीं करें ,क्योंकि उस बच्चे में मस्तिष्क ज्वर( दिमागी बुखार) के लक्षण हो सकते हैं ।
उपरोक्त बातों की जानकारी पाथ के प्रखंड मोनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने हसपुरा प्रखंड के डीह के राजकीय मध्य विद्यालय स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र में आयोजित सामुदायिक बैठक में महिलाओं व किशोरी बालिकाओं को मच्छरजनित ए.इ.एस बिमारियों से जागरुक करते हुये कही ।बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया कि मलेरिया,डेंगु,चिकनगुनिया,मस्तिष्क ज्वर(दिमागी बुखार),रोटा वायरस व जीका वायरस मच्छरजनित बिमारी है जो मादा मच्छर के काटने होती है ,परन्तु उपरोक्त बिमारी में से सबसे लाइलाज व जानलेवा मस्तिष्क ज्वर है जो मादा क्युलेक्स नामक मच्छर काटने से होता है ।
श्रीसिन्हा के अनुसार मस्तिष्क ज्वर के रोगी में तेज बुखार के साथ,उल्टी,कँपकँपी,सिरदर्द,सुस्ती व कमजोरी के लक्षण के अलावा मुँह से झाग आता है,दाँत कटकटाता है,बच्चा नींद में बड़बड़ाता है,गर्दन लुढक जाता है व शरीर अकड़ जाता है ।
बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया कि मच्छरजनित बिमारियों से बचाव के लिए लोंगों को खुले में शौच नहीं करना चाहिए ।
बैठक में र्दजनों महिलाएँ,किशोरी बालिकाएँ सहित आंगनवाड़ी सहायिका उपस्थित थीं .
