शव मिलने के बाद शहर में सनसनी फैली हुई है,लोग तरह तरह के चर्चा कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार मृतका आशा देवी को उसके पति एवं ससुराल वालों द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। वर्तमान में वह अपने मायके में रह रही थी। इस बात का खुलासा मृतका के पिता खुदवां थाना के लहसा गांव निवासी रामाधार सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में किया गया है। प्राथमिकी में मृतका के पति दाउदनगर थानाक्षेत्र के हिच्छन बिगहा निवासी अभय सिंह, उसके भाई अमरेंद्र सिंह और पिता राम जी सिंह को नामजद आरोपित बनाते हुए कहा गया है कि आशा की शादी अभय सिंह के साथ वर्ष 2011 में हुई थी ।उसके पति एवं उसके परिवार वाले दान दहेज को लेकर प्रताड़ित किया करते थे। अभय सिंह ने दूसरी शादी भी कर ली है, जिसे लेकर मृतका आशा देवी द्वारा 6 जुलाई 2017 को अपने पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की प्राथमिकी दाउदनगर थाना में दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पति को छोड़कर सभी आरोपी जमानत पर हैं। मृतका के पिता का प्राथमिकी में कहना है कि आरोपित उन्हें और उनकी बेटी को केस उठाने के लिए और जान मारने की धमकी दिया करते थे मंगलवार की सुबह 8:00 बजे आशा अपनी मां भगमति देवी के साथ ओबरा बाजार इलाज कराने गई थी। शाम में करीब 5:00 बजे उसकी मां अपने घर लौट गई और बोली कि आशा ने गाड़ी पर बैठा कर बोला कि वह बाजार कर पीछे से आ रही है ,परंतु रात तक वह घर नहीं लौटी। बुधवार की सुबह सूचक के बड़े दामाद दाउदनगर थाना क्षेत्र के बुलाकी बिगहा निवासी बालेश्वर सिंह द्वारा खबर मिला कि आशा की हत्या करके लाश संसा गांव के पूरब रोड किनारे खेत के पास फेंका हुआ है। प्राथमिकी में कहा गया है कि उसकी बेटी की हत्या उसके पति, देवर एवं ससुर ने रास्ते में पकड़ कर धारदार हथियार से गला एवं गला के निचले भाग को रेत कर कर दी है।
बताया जाता है कि रामाधार सिंह की सिर्फ दो पुत्रियां ही थीं।बड़ी बेटी डोमनी देवी की शादी दाउदनगर थानाक्षेत्र के बुलाकी बिगहा निवासी बालेश्वर सिंह के साथ हुई थी।छोटी बेटी आशा देवी की शादी दाउदनगर के हिच्छन बिगहा निवासी अभय सिंह के साथ हुई थी।मृतका ने अपने पति अभय सिंह,ससुर रामजी सिंह,देवर अमरेंद्र सिंह व तालकेश्वर यादव पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए 6 जुलाई 2017 को प्राथमीकी दर्ज करायी थी,जिसमें पति को छोड़कर अन्य सभी आरोपित जमानत पर हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हत्यारों ने मृतका के शव पर उसका आधार कार्ड भी रख दिया था।माना यह जा रहा है कि हत्यारों की शायद यह मंशा रही हो कि शव की पहचान करने में आसानी हो।चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि आखीर मृतका ओबरा से दाउदनगर पहुंची कैसे।
