पिंटू आर्य की रिपोर्ट:
सोन तटीय क्षेत्र में अखिल मधेसिय वैश्य हलवाई वैश्य सभा द्वारा भगवान गणिनाथ जी महाराज की जयंती मनाई जाएगी।सभी तैयारी पूरी कर ली गई है,शनिवार को सुबह प्रभात फेरी निकाली जायेगी फिर उसके बाद सोन तटीय बाबा भुत नाथ मन्दिर के प्रांगण में जयंती मनाया जायेगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा एवं ओबरा विधायक वीरेंद्र सिंह होंगे।
ऐसा गत कई सालों से यहा किया जा रहा है बाबा को भगवान शंकर का मानस पुत्र मना जाता है।
विक्रम सवंत 1007 में श्री मनसा राम तथा उनकी पत्नी सियादेवी के गर्भ से गणिनाथ जी का उद्भव गुरलमंधता पर्वत पर भाद्रपद बद्री अष्ठमी शनिवार के प्रातः में हुआ।शशु गणि जी का लालन पालन व शिक्षा दीक्षा का दायित्व कांडू वैश्य परिवार के मनसा राम को धर्म पिता के रूप में निर्वाहन करने के पड़ा गणि जी योग्य होने पर प्रारम्भिक शिक्षा गुरुकुल में की जहा अल्पकाल में ही वेद वेदांग में दक्षता प्राप्त की।चतुर्दिक ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु गोरखनाथ को गुरु ग्रहण करते हुए उनके सानिध्य में वर्सो तप किये सिद्दियों पर अधिकार प्राप्त कर पलवाया की पवित्र धरती पर पहुचे जहा अपने गणराज्य की स्थापना कर समातम राज्य स्थापित किया।
हिन्दू समाज जब पतन की ओर जा रहा था तो गणि नाथ जी ने हिन्दुओ में स्वाभीमन भरा ओर हिन्दू या सनातन संस्कृति की रक्षा की।प्लवया में गणिनाथ मंदिर और उस मंदिर की ओर से संरक्षित संस्कृत पाठशाला कुआ पोखरा आदि है।उन्होंने सन्ति के साथ अहिंसा का भी पाठ पढ़या तथा वेदाध्यन को ब्राह्मणों के चंगुल से मुक्त किया वंशवृक्ष स्मारिका के अनुसार कालांतर में गणि नाथ जी का विवाह झोटी साब की पुत्री क्षेमा सती से हुआ।उन्हें शिव का अवतार माना गया विक्रम सवंत 1112 (अष्विन महीना) नवरात्रि के अवसर पर आयोजित श्री जनोमोत्सव एवम शक्ति आराधना कार्यक्रम को सम्बोधन करने के उपरांत उन्होंने अपना देहत्याग किया


