संतोष अमन की रिपोर्ट:-
तेज बुखार से पीड़ित रोगी को अतिशीध्र निकटतम सरकारी अस्पताल भेजें । रोगी को कभी भी झोला छाप डाँक्टर,ओझा,बाबा या मौलवी पास नहीं भेजें,नहीं तो रोगी की जान जा सकती है । किसी रोगी या बच्चों में तेज बुखार का होना मच्छरजनित एक्युट इंसेफलाईटिस सिन्डोम (ए.इ.एस.) बिमारियों मलेरिया,डेंगु,चिकनगुनिया,मस्तिष्क ज्वर (दिमागी बुखार),जीका व रोटा वायरस का सुचक हो सकता है।
उपरोक्त बातें पाथ के मोनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने हसपुरा प्रखंड के खुटहन ग्राम के आँगनबाड़ी केन्द्र संख्या 90 पर आयोजित सामुदायिक बैठक में ग्रामीण महिलाओं को मच्छरजनित ए.इ.एस.बिमारियों मलेरिया,डेंगु,चिकनगुनिया,मस्तिष्क ज्वर ,जीका व रोटा वायरस से जागरुक करते हुये कही ।
बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया कि उपरोक्त सारी बिमारियाँ मादा मच्छर के काटने से होती है । इन सभी बिमारियों में से सबसे ज्यादा लाईलाज,जानलेवा व धातक मस्तिष्क ज्वर है जिसे दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता है ।उपरोक्त सभी बिमारियों में तेज बुखार के साथ उल्टी व कँपकँपी के सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं । ऐसी स्थिति में रोगी को प्राथमिक उपचार या घरेलु उपचार के तौर पर ताजे पानी की पट्टी दें और शीध्र अस्पताल भेजें ।
हमारे समाज में उपरोक्त बिमारियाँ नहीं हो , इसके लिए लोगों को स्वास्थ्य,स्वच्छता व साफ-सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए ।लोंगों को खुले में शौच एवं जहाँ- तहाँ गंदगी नहीं करनी चाहिए।अपने-अपने धरों व उसके आसपास के एरिया सहित नली -नाले की साफ- सफाई करनी चाहिए ।पीने के पानी को ढँककर रखना चाहिए ।साफ पानी पीना चाहिए । समय समय पर अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करना चाहिए । रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए ।
इस अवसर पर सेविका मनोरमा रानी सहित दर्जनों महिलायें उपस्थित थीं ।
इसके पहले सलेमपुर स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र पर आयोजित सामुदायिक बैठक में सेविका कविता देवी व सहायिका मीना कुमारी उपस्थित थीं ।