दाऊदनगर के कई इलाक़ों को छान मारा तब जाकर एक शौचालय मिला मगर…
अपने शहर में शौचालय का ना होना दुर्भाग्यपूर्ण है और इस समस्या को कई बार आम जनता की आवाज़ के माध्यम से तो कभी मीडिया द्वारा प्रकाश में लाने का प्रयास किया गया है। दाऊदनगर में आसपास के कई गाँओं के लोगों के लिए बहुत सारी सुविधाएँ उपलब्ध होती है जिसका लाभ नगर वासियों के साथ साथ ग्रामीणों को भी मिल जाता है। आसपास के इलाक़ों से लोगों का आना जाना लगा रहता है और ऐसी परिस्थिति में एक भी शौचालय का ना होना चिंताजनक विषय बन जाता है। पुरुष के साथ साथ महिलाओं के लिए भी किसी प्रकार की व्यवस्था अबतक नहीं की गई है।

लोगों से मिलने जुलने के क्रम में कई इलाक़ों में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। उसी बीच अनुमंडल परिसर में जाने पर एक सुलभ शौचालय दिखाई दिया मगर ओ आम जनता के पहुँच से बाहर की चीज़ लगी। कहने को तो ये सुलभ शौचालय है मगर ज़रूरतमंदों का यहाँ तक पहुँचना लगभग नामुमकिन है। मेरी समझ से परे यह सुलभ शौचालय अनुमंडल परिसर के इलाक़े में किसके लिए बनाई गई है? अगर वहाँ पर है भी तो उसका इस्तेमाल क्या आमलोग कर पाते हैं? जब मैंने देखा तो ताला लगा हुआ पाया। मुख्यमंत्री विकास योजना के अंतर्गत तक़रीबन साढ़े तेरह लाख रुपये से तीन महीने में निर्मित इस शौचालय से जुड़ी हुई कई सवाल मेरे मस्तिष्क में जन्म ले रही:
– इसका इस्तेमाल पिछले दो वर्षों से कौन कर रहा है?
– इसका निर्माण किस मक़सद से कराया गया था?
– यह शौचालय कितने बजे खुलती है और कितने बजे बंद होती है?
– इसकी देखरेख का ज़िम्मा किसने और किसे सौंपा है?
– शौचालय का मेनटेनेंस कहाँ से होता है और कौन करता है?
– क्या इसी योजना के अंतर्गत और शौचालय शहर के बाज़ार के इलाक़े में निर्मित नहीं कराए जा सकते?