गुरू पूर्णिमा के अवसर पर दाउदनगर हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना की गई। गुरू के महत्व पर प्रकाश डालते हुये आचार्य रघुवंशमणि पांडेय एवं हनुमान मंदिर के सेवक पंo देवशरण मिश्र ने कहा कि माता-पिता जन्म देने के कारण पूजनीय हैं किंतु गुरू धर्म और अधर्म का ज्ञान कराने के कारण अधिक पूजनीय है। गुरूदेव की सेवा व पूजा से जीवन जीने की कला के साथ परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग भी दिखाई पड़ जाता है। गुरू पूजा का अर्थ किसी व्यक्ति का पूजन या आदर नहीं है वरन उस गुरू की देह में स्थित ज्ञान का आदर है। ब्रह्म ज्ञान का पूजन है। पूजा अर्चना के बाद प्रसाद का भी वितरण किया गया। इस मौके पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अटल बिहारी, सचिव सुरेश प्रसाद गुप्ता, अवधेश उपाध्याय, पप्पु गुप्ता, केदार प्रसाद आर्य, मुन्ना कुमार, राजेश कुमार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
उतराखंड के बद्रीनाथ में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ चर्तुमासा महायज्ञ में गुरू पूर्णिमा धूमधाम से मनाया गया। यह महायज्ञ स्वामी पुरूषोतमाचार्य जी महाराज के तत्वाधान में कराया जा रहा है। जिसमें पुराना शहर सोनतटीय क्षेत्र स्थित सूर्य मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। दाउदनगर क्षेत्र से भी काफी संख्या में श्रद्धालु महायज्ञ में पहुंचे हैं। सूर्य मंदिर कमेटी से जुडे सदस्यों ने बताया कि करीब 70 की संख्या में श्रद्धालु महायज्ञ में भाग लेने पहुंचे हैं। गुरू पूर्णिमा के अवसर पर पूजा अर्चना की गई और स्वामी जी का प्रवचन हुआ। वृंदावन की प्रवचनकर्ता सुमन किशोरी का प्रवचन शुरू हुआ जो 15 दिनों तक चलेगा
