नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद दाउदनगर में नगर निकाय चुनाव नहीं हुआ है।दर्जा मिलने के बाद आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही चुनाव हो पाएगा,तब वार्ड पार्षद चुनकर आएंगे।9 जून को नप बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और एसडीओ प्रशासक की भूमिका में हैं।वार्ड स्तर पर आम जनता के कई ऐसे कार्य हैं,जिसे लेकर पिछले बोर्ड के वार्ड पार्षद भी किंकर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में हैं।शहर की जनता के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं, शादी का रजिस्ट्रेशन नही हो पा रही है। शहर के वार्ड संख्या-5 में नौ जून के बाद दो शादियां हुई हैं।मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के लिए आवेदन देने में शादियों के निबंधन प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है,जो वार्ड पार्षद करते रहे हैं।अब समस्या यह है कि नौ जून के बाद की शादियों का निबंधन कौन करें।वार्ड संख्या 5 के वार्ड पार्षद रहे बसंत कुमार का कहना है कि कार्यकाल समाप्ति के बाद कोई गाइड लाइन नहीं आया है।यह किसी एक वार्ड की नहीं बल्कि सभी वार्डों की यही स्थिति है।हांलाकि एक उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि वार्ड पार्षद शादियों का निबंधन तो बतौर विवाह निबंधन पदाधिकारी कर देते हैं,लेकिन उसका ब्यौरा नप कार्यालय में उपलब्ध नहीं होता।सूत्रों के अनुसार कार्यकाल समाप्ति के उपरांत रजिस्टर भी जमा नहीं किया जाता ,जिससे भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर जांच पड़ताल हो सके।
कबीर अंत्येष्टि योजना भी प्रभावित-बीपीएल परिवार के किसी सदस्य का निधन होने पर कबीर अंत्येष्टी योजना के तहत राशि दिये जाने का प्रावधान है,इसके लिए संबंधित वार्ड पार्षद एवं संबंधित वार्ड के तहसीलदार के नाम से संयुक्त खाता बैंक में खुला हुआ है।हांलाकि,आवंटन के अभाव में इस मद की राशि अभी नहीं है,लेकिन यदि राशि का आवंटन हो गया तो आवश्यकता पड़ने पर संबंधित आवेदक को इस मद की राशि किस प्रकार मिल पाएगी-यह भी एक प्रश्न है।कौन करें अनुशंसा-सूत्रों के अनुसार,सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नये आवेदकों के आवेदन पर भी वार्ड पार्षद अनुशंसा करते रहे हैं।बदली परिस्थिति में आवेदकों के आवेदन पर अनुशंसा भी एक समस्या बनी हुई है। जब इन सब मुद्दों पर जब संबंधित पदाधिकारियों से पूछा गया तो जो जवाब मिला उसे संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। कार्यपालक पदाधिकारी वीपीन बिहारी सिंह से पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि पता लगाकर नगर विकास एवं आवास विभाग से मार्गदर्शन मांग लेते हैं।वहीं एसडीओ सह नप के प्रशासक राकेश कुमार ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी को नगर विकास एवं आवास विभाग से मार्गदर्शन मांगना चाहिए।
