
स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय युवा मंच द्वारा सोमवार को मंच के राष्ट्रीय संयोजक अनुज कुमार पांडेय के नेतृत्व में 1999 में हुई भारत-पाकिस्तान (कारगिल, ऑपरेशन विजय) युद्ध के परमवीर योद्धा शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय के शहादत दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दाउदनगर में मरीजों के बीच फल वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉक्टर उपेंद्र कुमार सिंह, डॉक्टर विनोद शर्मा, स्वास्थ्य प्रबन्धक विकास शंकर, वी.सी.एम. शशि शर्मा, निवर्तमान वार्ड पार्षद बसन्त कुमार, श्री निवास शर्मा, अजय कुमार पांडेय, सन्तोष अमन, डॉक्टर विकास मिश्रा, दीपक, राजा, राजन मिश्रा, प्रकाश मिश्रा, अभिषेक कुमार उपस्थित रहे।
शहीद प्रमोद सिंह पथ, महात्मा ज्योतिबा फुलेनगर में अवस्थित मंच के कार्यालय में अनुज कुमार पांडेय की अध्यक्षता में एक पुष्पांजली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बसन्त कुमार, श्री निवास शर्मा, अजय कुमार पांडेय, सन्तोष अमन, डॉक्टर विकास मिश्रा, राजन मिश्रा, अभिषेक कुमार, निर्भय कुमार उपस्थित रहे। सभी लोगों ने शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उनके अमर बलिदान को याद किया। बसन्त कुमार ने संबोधित करते हुए शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय को भारत का वीर सपूत बताया। उन्होंने कहा कि देश इन जैसे वीरों का ऋण कभी नहीं चुका पायेगा। श्रीनिवास शर्मा ने शहीद मनोज कुमार पांडेय को याद करते हुए इस तरह के आयोजन के लिए मंच की प्रशंसा की।

अनुज कुमार पांडेय ने शहीद कैप्टन मनोज कुमार की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक महान देशभक्त और दृढ़निश्चयी व्यक्तित्व के स्वामी थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में 1975 ई. में हुआ था। अपनी माता के मार्गदर्शन, उनके द्वारा सुनाई जानेवाली वीरता और सद्चरित्र वाली कहानियों से प्रभावित होकर आर्थिक रूप से पिछड़े हुए परिवार में जन्म लेकर भी मनोज कुमार पांडेय ने अपने अथक परिश्रम के कारण पहले सैनिक स्कूल लखनऊ और फिर सेना के कैप्टन तक का सफर गौरवपूर्ण तरीके से पूर्ण किया। उनकी देश के प्रति अटल निष्ठा का इसी से पता चलता है कि जिस समय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी(N.D.A.) के च्वाइस वाले कालम में जहाँ यह लिखना होता है कि वह जीवन में क्या बनना चाहते हैं, क्या पाना चाहते हैं? वहाँ सब लिख रहे थे कि मुझे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनना है, मुझे विदेशों में पोस्टिंग चाहिए आदि आदि, उस फार्म में देश के इस बहादुर बेटे ने लिखा था कि केवल और केवल परमवीर चक्र चाहिए।