हम नहीं बने तो क्या हुआ, हम इंजिनीयर बना तो सकते हैं- एकेडी

कल दिनांक 30 जून को दाऊदनगर स्थित विज़न आइटी कॉलेज के कैम्पस में विज़न इंटरमीडीएट क्लासेस की नीव डाली गई। उद्घाटन समारोह में शामिल हज़ारों की तादाद में छात्र-छात्राएँ एवम् आगंतुक ने समारोह को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के निदेशक अरविंद कुमार धीरज समेत अन्य शिक्षकों ने फ़ीता काट कर समारोह की शुरुवात की। संस्था के अंग्रेज़ी के शिक्षक संजय किशोर ने मंच संचालन का कार्यभार सम्भालते हुए आगामी क्लासेस एवं  शिक्षकों के बारे में जानकारी दी।

उद्घाटन के दौरान सैकड़ों रंगबिरंगे ग़ुब्बारे छोड़े गए और प्रत्येक ग़ुब्बारे पर इंटरमीडीएट क्लासेस से सम्बंधित हैंडबिल लगाई गई। कुछ पल के लिए आसमान रंगीन गुब्बारों से भर गया था। इस प्रकार एक नए सोंच को नगरवासियों के बीच रखने का प्रयास किया गया। मंच संचालन करते समय श्री किशोर ने कहा भी था कि हमारा लक्ष्य कुछ नया करना है। नयी सोंच के साथ शिक्षा पद्यती में बदलाव लाना है, शिक्षण प्रणाली को सहज बनाना है ताकि शिक्षा छात्रों के लिये बोझ ना लगे।


भौतिक विज्ञान में निपुणता रखने वाले संस्था के निदेशक एकेडी ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं एंजिनीर बनना चाहता था पर नहीं बन पाया, अफ़सोस तो होता है। परंतु मैं ख़ुश इसलिए भी हो जाता हूँ कि मैं इंजीनियर नही बना तो क्या हुआ मै इंजीनियर बना तो सकता हूँ। उन्होंने कहा कि 8 से 12 वर्षों के अनुभवी शिक्षकों की टिम गठित कर हमने आगामी क्लासेस की नीव रखी है। अच्छि बात यह है कि क्लास शुरू होने से पहले ही तक़रीबन सौ छात्रों ने नामांकन भी करवा लिया है।

One comment on “हम नहीं बने तो क्या हुआ, हम इंजिनीयर बना तो सकते हैं- एकेडी
  1. Vivek sir says:

    It is overwhelming response as concerned of team would make better as much as possible

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