अपनी जवाबदेहियों से बच नहीं सकती सरकार

संतोष अमन की रिपोर्ट:

इंटरमीडिएट परीक्षा में छात्रों के खराब प्रदर्शन का ठीकरा सरकार उन निरीह शिक्षकों के मत्थे फोड़ना चाहती है जिनका प्रदेश की शिक्षा नीति बनाने में कोई कोई रोल नहीं है। अगर सरकार ने ‘समान स्कूल प्रणाली आयोग’ की सिफारिशों को आठ जून 2007 को प्राप्त होने के तुरंत बाद लागू किया होता तो आज राज्य को शैक्षणिक अराजकता का यह दुर्दिन नहीं देखना पड़ता और न ही प्रदेश की इतनी बदनामी होती।उक्त बातें बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट)के संयुक्त सचिव सत्येन्द्र कुमार ने कही। उन्होंने कहा है कि नीतियों को लागू करने के मामले में भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था के पद सोपान में शिक्षक सबसे नीचे के स्तर पर हैं। अगर कोई शिक्षक अपने कर्तव्य के निर्वाहन में कोताही करता है तो उनपर निश्चित रुप से कार्रवाई हो (कार्रवाई होती भी रहती है) परन्तु यह कहाँ का इंसाफ है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई असफलता के लिए सिर्फ़ निचले स्तर के कर्मियों को ही बलि का बकरा बनाकर ऊपरी स्तर पर नीति निर्माण से लेकर उन्हे क्रियान्वित करने तक के मामले में पर्याप्त रुप से अधिकार सम्पन्न लोगों को साफ़ छोड़ दिया जाये। अगर मौजूदा असफलता एवं अराजकता की जिम्मेवारी तय करनी ही है तो बिल्कुल ऊपरी स्तर से शुरू कर के नीचे की तरफ़ आया जाये। अगर ऐसा न कर के सिर्फ़ शिक्षकों एवं छोटे पदाधिकारियों-कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जायेगा तो बिहार के शिक्षक-कर्मचारी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। आज की शैक्षणिक क्षेत्र की यह असफलता एवं अराजकता नीतिगत स्तर पर व्याप्त खामियों का ही अनिवार्य नतीजा है जिसमें सरकार ही पूरी सरकारी शिक्षा-व्यवस्था को ध्वस्त कर के इसे निजी मुनाफाखोरों के हाथों में सौंप देना चाहती है। बल्कि यूँ कहें कि इसे निजी हाथों में एक हद तक सौंप ही चुकी है और बाकी बचे-खुचे को भी अपनी दोषपूर्ण नीतियों के माध्यम से जल्द ही ध्वस्त कर के सौंप देने पर आमादा है। अगर सरकार की मंशा ऐसी  नहीं है तो आज तक उसने ‘समान स्कूल प्रणाली आयोग’ की सिफारिशों को लागू क्यों नहीं किया? जबकि उसकी अनुशंसाए सरकार को आज से दस वर्ष पूर्व 8 जून 2007 को ही प्राप्त हो चुकी थी। अगर उस समय ही समान स्कूल प्रणाली आयोग की अनुशंसाए लागू कर दी गई होतीं तो आज न तो इतने बड़े पैमाने पर छात्र फेल होते और न ही शैक्षणिक अराजकता का मौजूदा माहौल ही दिखाई पड़ता; बल्कि आज यह राज्य शिक्षा-व्यवस्था के मामले में एक मॉडल राज्य बन गया होता। उन्होंने शिक्षक कर्मचारी एवं आम जनों से यह अपील करते हुए कहा है कि वे ‘समान स्कूल प्रणाली आयोग’ की सिफारिशों को लागू कराने के वास्ते आगामी 8 जून 2017 को ‘समान शिक्षा अधिकार मंच’ के बैनर तले पूरे राज्य में  प्रखंड, अनुमंडल, जिला, प्रमंडल स्तर पर हो रहे धरना प्रदर्शन, विचार-गोष्ठी, कंवेंशन इत्यादि कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भाग लें।इसके अलावे अन्य तौर-तरीकों से भी जन-दबाव पैदा कर के सरकार को ‘समान स्कूल प्रणाली आयोग’ की सिफारिशों को लागू करने के लिए बाध्य किया जाये ताकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक आमूलगामी बदलाव लाया जा सके। उनका संगठन महासंघ (गोप गुट) उक्त किस्म के बदलाव लाने के लिए किये जानेवाले हर प्रयास का समर्थन करेगा तथा 8 जून 2017 को होनेवाले उक्त  कार्यक्रमों में भी हर स्तर पर शामिल होगा।

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