हम बिहारी अपना अपमान नहीं सहेंगे- कहीं भी, कभी भी

पूर्व जस्टिस काट्जू ने विवादित बयान देकर पूरे बिहार वासियों को अपमानित करने की कोशिश की है। उस विवादित बयान को लेकर बिहार के तक़रीबन सभी राजनितिक पार्टियों ने भी आपात्ति जताई है जिसका पुरे बिहार वासियों की तरफ से खुल कर समर्थन किया जा रहा है। आये दिन ऐसा देखने को मिलता है कि जो ना तो बिहारी हैं और नाही किसी प्रकार से ओ बिहार से जुड़े हुए हैं उन्हीं लोगों को बिहार की ज्यादा चिंता सताती है। किसी भी अनुचित घटना के सन्दर्भ में बिहार का नाम लेकर खुद को महान समझना एक फैशन सा बनता जा रहा है।

अपने पोर्टल के माध्यम से हम यह बताना चाहेंगे कि अब और नहीं, हम बिहारी अपना अपमान नहीं सहेंगे। जिस प्रकार पूर्व जस्टिस काट्जू का विरोध बिहार वासियों ने किया है उससे आने वाले दिनों में और लोगों के लिए यह एक सीख होगा। लोग हमें आसान समझ बैठे थे पर हमारी उपलब्धियों के बारे में न तो जानते होंगे और नाही जानने की कोशिश की होगी।

किसी शायर की यह मशहूर पंक्ति-

दिल बहलाने का सामान न समझा जाये, 

हमें इतना भी आसान न समझा जाये
सोशल मीडिया पर भी उनकी जम कर खिंचाई हो रही है:

हम बिहारी मधुमक्खी की तरह हैं, प्यार के बदले शहद और अपमान के बदले डंक मारते हैं। काजू महाराज आपने तो मधुमक्खी के छत्ते में एक ऊँगली नहीं बल्कि अपने आप को पूरी तरह घुसेड़ लिया है। बचने का कोई रास्ता नहीं माफ़ी मांगिये या फिर हमारे विरोध का सामना कीजिये

यह चाणक्य की धरती है, गौतम, महावीर, मौर्य, शेरशाह  का चमन है। आप डॉ राजेंद्र प्रसाद को भूल गए क्या???

सिर्फ डी एन ए की बात पर मोदी जैसे कद्दावर नेता को मुंह की खानी पड़ी और आप कौन से बगीचे के काजू हो???

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