जे.ई. का टीका बचाता है मस्तिष्क ज्वर से–सिन्हा

 दाउदनगर, 25 मार्च

     वर्तमान समय में मच्छरजनित ए.ई.एस ( एक्युट इंसेफलाईटिस सिन्डोम ) एवं जे.ई. बिमारियों में से सबसे लाईलाज व खतरनाक बीमारी मस्तिष्क ज्वर है जिसे अंग्रेजी में जैपनीज इंसेफलाईटिस (जे.ई.) कहते हैं । यह बीमारी एक से पन्द्रह वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों में क्यूलेक्स नामक मादा मच्छर के काटने से होती है ।

        उपरोक्त बातें पाथ के प्रखंड मोनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने  गोह प्रखंड के प्रतापपुर गॉव के राजकीय प्राथमिक विधालय स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 182  में आयोजित सामुदायिक बैठक मे महिलाओं व स्कुली बच्चों को मच्छरजनित बिमारियों से  जागृत करते हुये कही । 

     बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया कि प्रत्येक बच्चे के माता पिता को अपने बच्चों को नौ माह से चौबीस माह आयु के बीच जे.ई.( जैपनीज इंसेफलाइटीस )के दो टीके लगवाना चाहिए । इस बीमारी में रोगी को तेज बुखार के साथ उल्टी,कँपकँपी,बेहोशी होती है,रोगी नींद में बड़बड़ाता है ,मुँह से झाग निकलता है.चमकी आता है.शरीर में असामान्य लक्षण दिखाई देता हैं, उसे कमजोरी व सुस्ती होता हैं ।

एसी स्थिति में रोगी को टंढे पानी की पट्टी देकर उसे अतिशीध्र निकटतम सरकारी अस्पताल भेजना चाहिए ।

         श्रीसिन्हा ने कहा कि ए,ई,एस बिमारियों –मलेरिया,डेंगु चिकनगुनिया एवं मस्तिष्क ज्वर.से बचाव के लिए लोगों को अपने अपने धरों व नली नालियों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए एवं रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए । 

     बैठक में सेविका इंदु कुमारी,सहायिका शारदा.देवी एवं शिक्षिका मंजु कुमारी सहित  दर्जनों महिलाएं व स्कुली बच्चे मौजूद थे ।


      इसके पहले श्रीसिन्हा द्वारा हसपुरा प्रखंड के सोनहथु गाँव में आँगनबाड़ी केन्द्र संख्या 50 एवं 102 पर आयोजित सामुदायिक बैठक में  सेविका प्रमिला कुमारी,राधा कुमारी व सहायिका सूर्या कुमारी व ममता कुमारी उपस्थित थीं ।

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