जनता की आवाज =पान पर चर्चा कर आपसी भाई चारा बनाएं।

                            सतीश पाठक

 जनता की आवाज=

पान खाए सैयां हमारो !!! सावली सुरतिया होठ लाल लाल !!! हाय हाय मलमल का कुर्ता !!! मलमल के कुर्ते पर छींट लाल लाल !!! पान खाए सैयां हमारो…………..

चली आना तू पान दूकान पे !!! साढ़े हुम…

साढ़े हुम…. साढ़े तीन बजे !!! औ रस्ता देखूंगा मैं पान कि दूकान पे !!! साढ़े तीन बजे !!!

हम पान के शौकीन कभी कभी पान खा लेते है,अगर कोई खिला दे तो वरना अपने पैसे से तो किसी को खिलाते भी नहीं,पान का आर्थिक,सामाजिक और विशेष कर राजनीति महत्त्व उसदिन समझ में आया जब पप्पू भाई के साथ पान के दुकान पर पान खाने गया,मुझे लगा ऐ टीवी चैनल वाला झूठ में इतना खर्च कर डिबेट लीला  करवाते है यकीन मानो जिस दिन ये डिबेट पान के दुकान पर हुआ उस चैनल की टीआरपी दुगनी चौगनी हो बढ़ जायेगी,पान के शौकीन की राजनीति समझ और तर्क शक्ति के आगे बड़े बडे राजनीति दल के प्रवक्ता चुना पोछते नजर आयेंगे,
            पान कि दुकानों का एक चक्कर लगा के तो देखो,आपसी भाई चारा और प्रत्येक राजनीति दल का पान के प्रति  आपसी  गठबंधन देख कर आप धनचकर हो खा जावगे, पान की दुकान से कुछ सिख लेने में ही फायदा है जब ये नेता जी लोग पान खा कर एक दूसरे को खिला कर आपसी भाई चारा बनाय रख सकते है और एक दूसरे को सम्मान दे पान का मजा लेते है तो हम आम जनता क्यों झूठ के एक दूसरे पर टिका टिपणी
कर बैर की भावना रखे,तो आइये पान पर चर्चा कर आपसी भाई चारा को बनाये और एक मजबूत समाज का निर्माण करे कुछ ऐसे भी मिलेंगे जो इसमें रूकावट पैदा करेंगे परंतु परेशान नहीं होना है उन्हें जर्दा वाला पान दिलाना है और तब तक खिलाना है जब तक उनका दाँत काला न हो जाये।

                          सतीश् पाठक

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