आधुनिकता की मार ऐसी पड़ी कि घरौंदे होने लगे गुम।

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एक समय था कि दशहरा समाप्त होते ही गांवों व शहरो में मिट्टी के घरौंदे बनने लगते थे। समय के साथ आधुनिकता की मार ऐसी पड़ी कि ये घरौंदे गुम होने की स्थिति में आ गये हैं। इनका स्थान आज लकड़ी,थर्मोकोल के घरौंदों ने ले लिया है। बाजार में एक सौ रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक की कीमत में उपलब्ध इन घरौंदों को खरीदने के लिए खरीदारों की भीड़ दुकानों पर जमा हो रही है।पहले जहा मिट्टी के घरौंदा बना करते थे, वहीं आज लकड़ी, प्लाई बोर्ड, थर्मोकोल के घरौंदे बजार में बिक रहे हैं।

समय के साथ घरौंदे ने बदल लिया स्वरूप :

करीब एक दशक पूर्व तक गांवों में बड़े पैमाने पर घरौंदे बनते थे।दिवाली के ठीक पहले बच्चे खेतों से केवाल और चिकनी मिट्टी थैले में बंद कर लाते थे। मिट्टी को फूलाने के बाद ईंट, बास के टुकड़े आदि से घरौंदा बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो जाती थी। घरौंदा को आकर्षक बनाने के लिए रंगों से पुताई की जाती है। बहन और मा भी इसमें हाथ बंटाती थीं। समय के साथ परंपरागत चीजें लुप्त हो गईं। अब लोग रेडिमेड घरौंदा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। समय के साथ घरौंदे ने स्वरूप बदल लिया है।पहले जहां
हरेक घर में बच्चे, यहां तक की महिलाएं व बुजुर्ग भी घरौंदे बनाने में जी जान लगा देते थे। इसे बनाने में इस बात की भी होड़ होती थी कि गांव में किसका घरौंदा सबसे अच्छा है। मिट्टी से जुड़े बच्चे पर्व को लेकर साल भर इंतजार करते थे। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आते थे, बच्चों संग बड़ों की भी उत्सुकता बढ़ती जाती थी।इसी घरौंदे में दीपावली के दिन लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों को स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती थी। दीपावली के मौके पर महिलाएं, युवतियां मिट्टी से घरौंदा तैयार करती थी। फिर उसको रंगों से सजाती थी। मिट्टी के दीये जलाकर नौ प्रकार के चीनी निर्मित रंग-बिरंगे मिठाई, सात प्रकार का भुंजा आदि मिट्टी के बर्तन में भरकर विधि-विधान के साथ महिलाएं घरौंदा पूजन करती थी। इसके बाद आतिशबाजी की जाती थी। लेकिन यह परंपरा शहर में तो पूरी तरह समाप्त होती नजर आ रही है। ग्रामीण अंचलों में थोड़ी बहुत इसकी रस्म अदायगी भले ही की जा रही है।समय के साथ यह व्यवस्था बदलने लगी और आज स्थिति यह है कि गांव में घरौंदे बनने बंद हो गये। लकड़ी,प्लाई बोर्ड,थर्मोकोल के घरौंदे ने इसका स्थान ले लिए। नई पीढ़ी के बच्चे, महिलाएं मिट्टी का घरौंदा बनाना पसंद नहीं कर रही है। यही कारण है कि बाजारों में रेडीमेड घरौंदा बिकने लगा है।

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