एस अमन:
आज के ही दिन औरंगाबाद जिले एवं दाउदनगर वासियों के लिए दाउदनगर नासरीगंज पुल के रूप में एक नई सौगात मिला था। 16 फरवरी 2019 को इसे शुरू किया गया था।इस पुल का उर्द्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा होना था पर पुलवामा हमले की घटना के कारण आगमन स्थगित हो गया था।फिर तत्कालीन डीएम ने इसे परिचालन शुरू कराया था।
दाउदनगर नासरीगंज के बीच सोन नदी पर बना उच्चस्तरीय पुल एवं अप्रोच रोड पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में सहायक हुआ है।सबसे बड़ी बात यह है कि यह पुल मगध क्षेत्र को शाहाबाद क्षेत्र से सीधे जोड़ दिया है,जो दो संस्कृतियों का मिलन हुआ है।मगधवासी सीधे तौर पर भोजपुरवासियों से जुड़ गये।।हालांकि अभी तक अप्रोच रोड तैयार नही हुआ है।अप्रोच रोड बनने के बाद इस पुल पर्यटन को बढ़ावा देगा ।भविष्य में या बुद्ध सर्किट के रूप में विकसित हो सकता है।भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया की दूरी भगवान बुद्ध के दीक्षांत स्थल कुशीनगर से करीब 80 किलोमीटर कम हो गई है । जब आवागमन की सुविधाएं बढ़ गई है तो सोन नदी इलाके में खेती सुगम हो गई है। फल व सब्जियों को नया मंडी मिल रहा है।
चुना गया था एचसीसी एजेंसी को:
2014 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शासन के आठ साल पूरे होने पर पुलों को बनाने की घोषणा की थी।जिसमें गंडक और सोन नदी पर एक-एक पुल का का नाम प्रस्तावित हुआ था। पुल निर्माण के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया से गुजरते हुए सोन नदी पर औरंगाबाद जिले के दाउदनगर और रोहतास जिले के नासरीगंज के बीच पुल बनाने के लिए ‘एचसीसी एजेंसी का चुना गया था। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा एजेंसी का नाम फाइनल किया गया था। बिहार में सोन नदी पर पहले से ही तीन पुल बने हुए हैं। जिसमें आरा-पटना नेशनल हाइवे पर कोईलवर पुल, अरवल-सहार पुल और डेहरी पुल शामिल है।अब एक और नाम जुड़ गया।
पूरे लगे पांच साल:
इस पुल का कार्यारंभ नौ फरवरी 2014 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ही कराया गया था। पूरे पांच साल के अवधि में पुल बनकर तैयार हुआ है।जब पुल निर्माण कार्य
शुरू हुआ तो लोग खुशी से फुले नही समा रहे थे।लोगो का सुबह सुबह इस तरह टहलने का भी माध्यम बन गया था। कार्य निर्माण भी देखने को मिल जाता था साथ मे सुबह का सैर सपाटा भी।
जाना पड़ता था पैदल व नाव से:
पहले जब लोगो को नासरीगंज जाना रहता था तो जमाल घाट या महादेवा घाट के लिए पैदल काफी दूर तक जाना पड़ता था।बालू ,कांट जंझार होते हुए बीच मे ठेहुना भर पानी से गुज़र कर घाट पर पहुंचते थे फिर नाव से जमालघाट पहुंचते थे। कभी कभी उधर से लौटते समय रात हो जाता था तो लोगो को डर भी सताता था ।यह डर जंगली जानवर या लूट का रहता था।अब यह सब से मुक्ति मिल जाने से लोगो मे काफी हर्ष है।पुल निर्माणकार्यकाल में ही लोगो को आवागमन में सुविधा मिलने लगी थी।
दाउदनगर क्षेत्र के लोग नांव से गहने, बर्तन ,कपड़े आदि खरीदने के लिए जाते रहते हैं।
पुल निर्माण एजेंसी देख चुकी है आपदा भी:
पुल निर्माण के अवधि में कम्पनी कई आपदा भी देख चुका है। 2016 में आयी बाढ में दाउदनगर-नासरीगंज सोन पुल बना रहे बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के निर्माण एजेंसी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के कर्मी व मजदूर फंस गए थे। तब फंसे 250 लोगों को मतस्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड के एक नाव के सहारे सुरक्षित बचा लिया गया था। बिहार के अलावा बंगाल, उडीसा, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के अधिकारी या कुशल मजदूर, कर्मी इस बाढ में फंस गये थे।
सोन पुल बन रही बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को करीब 35 करोड का नुकसान हुआ था।जेनसेट खराब होने से पानी पीने का समस्या आई थी।
जल्द बनना चाहिए अप्रोच रोड:
पुल उर्द्घाटन के बाद दाउदनगर बारुण रोड पर परिचालन बढ़ गई है। क्योंकि दो भाग में में परियोजना बंट जाने से तरारी के पास से अप्रोज रोड कार्य पूर्ण नही होने से दाउदनगर बारुण रोड से ही अप्रोज रोड से होते हुए नासरीगंज का मार्ग शुरू किया गया है। जिससे शहर में आवागमन बढ़ गई है।क्योंकि सिपहाँ पुल जर्जर होने के कारण भारी वाहन के आवागमन पर रोक है।जिससे दाउदनगर के नहर पुल होते हुए ब्लॉक मोड़ से अशोक उच्य विद्यालय के रास्ते से होते हुए बारुण रोड पर निकल रहा है ।जिससे इस सड़क पर वाहनों का परिचालन बढ़ गई है।अब बाज़ार वन वे व बड़े वाहन का नो एंट्री है ।
पुल से जुड़े आंकड़े:
1000 करोड़ की आई लागत
450 करोड़ रुपये लगे सिर्फ जमीन में
75 किमी दूरी कम हो गई है मगध और शाहाबाद के बीच।
