आज है कार्तिक पूर्णिमा

संतोष अमन,दाउदनगर (औरंगाबाद):

आज कार्तिक पूर्णिमा है।सभी श्रद्धालु सोन और पुनपुन में स्नान करते हैं।साथ ही मेला का भी आनंद उठाते हैं। घरों में कार्तिक पूर्णिमा का हवन भी होता है। इस दिन देवताओं की दीपावली भी मनायी जाती है। पंडित लालमोहन शास्त्री ने बताया कि भृगुरारी में मदाड़ और पुनपुन के संगम स्थल पर मेला लगता है। महर्षि भृगु द्वारा संचालित देव गुरुकुल विद्यापीठ स्थित भगवती नकटी भवानी का दर्शन करने को लेकर लोगो की भीड़ उमड़ती है। भगवान श्री राम द्वारा स्थापित भगवान शिव के लिंग पर श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक किया जाता है। बताया कि यह स्थान देवताओं एवं आदि ब्राह्माण भृगु एवं पुत्र शुक्राचार्य द्वारा सेवित है। इसका महत्व भागवत पुराण, आनंद रामायण, बाल्मिकी रामायण में दर्ज है।
इस दिन स्नान,दान और साधना करने से अनेक अनेक जन्मों का पाप नाश हो जाता है।शरीर स्वस्थ रहता है।और मनोकामना पूर्ण होती है।
आचार्य लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भृगरारी में प्राचीन काल से ही मेला का आयोजन किया जा रहा है।पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान कर मां नकटी भवानी का दर्शन किया जाता है।श्रद्धालु महादेव के विशाल लिंग पर संगम का जल चढ़ा कर अपने आप को धन्य मानते हैं।माना जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना श्री रामचन्द्र ने की थी।

किया था मदार नामक नदी प्रकट:
मदार के सबंध में हरिवंश पुराण का हवाला देते हुए आचार्य पंडित  लाल मोहन शास्त्री का कहना है कि भगवान मधुसूदन ने मदार नामक नदी प्रकट किया था।मदनपुर से होते हुए यह नदी टेकारी गांव के पास केसहर नदी से मिलती है।रफीगंज प्रखंड लटटा गांव में धावा नदी मदार से मिलती है।इन नदियों को आत्मसात करती हुई मार भृगरारी में मिल कर पवित्र तीर्थ का निर्माण करती है।महर्षि  भृग की तप स्थली व अध्यापन का केंद्र इस तीर्थ को माना जाता है।
देवी भागवत के अनुसार भृग पुत्र शुक्राचार्य जी ने अपनी माता पुलोमा की आराधना व मस्तक रहित धड़ की पूजा की थी।भगवान विष्णु के चक्र से काटे जाने के बाद भी उनकी माँ पुलोमा अपने पति भृग की साधना से जीवित हो गई थी।इसलिए नकटी भवानी के रूप में उनकी पूजा की जाती रही है।माना जाता है कि इनकी पूजा साधना करने से शत्रु पर विजय प्राप्त होता है।मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्री राम ने आकर संगम में स्नान कर मंदारेश महादेवलिंग की स्थापना की थी।आचार्य शास्त्री के अनुसार इसकी चर्चा आंनद रामायण व वायु पुराण में भी है।
पूर्वाभीमुख गढ़ पर स्थित है मां का मंदिर:
मां का मंदिर पूर्वाभिमुख गढ़ पर स्थित है।पंडित लाल मोहन शास्त्री के अनुसार मंदिर के अंदर की प्राचीन दीवार मिट्टी की है।अनेक प्रतिमाओं के साथ काला पत्थर में मस्तक विहीन वीरासन में बैठी एक फुट की मां का विग्रह है और इसके नीचे प्रतिमा के साथ गिरा हुआ मस्तक भी है।मध्य में गौरी शंकर की सुंदर युगल प्रतिमा है।मंदिर के ईशान कोण में शिवलिंग स्थापित है।मंदिर के बाहर वायव्य  कोण में भगवान श्री राम द्वारा स्थापित शिवलिंग भी है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.