गाय के गोबर से बन रही हैं प्रतिमा,दीये, धूप,अगरबत्ती
(आलेख:संतोष,अमन ,दाउदनगर )
गाय के गोबर से खाद और बायो गैस बनने के बारे में आपने जरूर सुना होगा, लेकिन अब गोबर के बने दीये, लक्ष्मी-गणेश, धूप,अगरबत्ती भी बन रही है।दाउदनगर अनुमंडल के चौरम गांव निवासी फ़िल्म व टीवी सीरियल के निर्देशक संतोष बादल ने गाय के गोबर से प्रतिमा, धूप,अगरबत्ती आदि बना आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। इसके लिए संतोष बादल फाउंडेशन के नाम से प्लांट तैयार किया है।
फिल्मों में अपना मुकाम बंनाने के बाद संतोष बादल अब गाय के गोबर से इसी वर्ष से इन चीजों का निर्माण कर रोजगार की राह खोल दी। श्री बादल के अनुसार बिहार में गोबर से ऐसे उत्पाद का निर्माण पहली बार हो रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द इसे अपने गांव चौरम में भी शुरू करेंगे,अभी मधुबनी में प्रयोग कर रहे हैं।इसके लिए कई लोगो को इसमें काम दिए हुए हैं। ऑर्डर के अनुसार इसे होम डिलीवरी भी किया जाएगा।उन्होंने लॉक डाउन में 500 से ज्यादा लोगो को रोजगार उपलब्ध करा दिया।
संतोष बादल बताते हैं कि दीया व प्रतिमा बनाने में सिर्फ गाय के गोबर का प्रयोग किया जा रहा है। क्योंकि गाय को सनातन संस्कृति में मां का स्थान प्राप्त है और इसके गोबर को पवित्र माना जाता है। इसके लिए गोशाला बनाए हैं। लोगो से गोबर भी खरीदते हैं।एक गाय इंसान को काफी सारे फायदे पहुंचाती है। इसे हम ही नहीं विज्ञान ने भी माना है। गाय के दूध, मूत्र और गोबर काफी उपयोगी होते हैं। यही कारण है कि गाय को ङ्क्षहदू धर्म में मां का दर्जा दिया जाता है। गाय के दूध से बनने वाले घी की बात करें या मूत्र की यह कई बीमारियों में साधक बने हैं। ऐसे ही गोबर है, यह रोजगार भी देता है।
प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति:
संतोष बादल फाउंडेशन ने नदियों में होने वाली मूर्तियों के विसर्जन को घर मे ही विसर्जित करने का प्रयोग किया है। अगर आप ऑनलाइन प्रतिमा मंगाते हैं तो आपके घर पार्सल में देशी गाय के गोबर से बने गणपति आएंगे आप पूजा कर के उसी पार्सल बॉक्स में गणपति को विसर्जित कर देंगे। वो पार्सल बॉक्स कुछ दिनों में आपके गैलरी का गमला बन जायेगा और उसमें आप कोई भी फूल लगा लीजिए। अगर आप सीधे तौर पर खरीदते हैं तो इन प्रतिमाओं को घर के गमलों और क्यारियों में भी विसर्जित कर सकेंगे। जिसके बाद प्रतिमाएं खाद का काम करेंगी। आम तौर पर लोग पीओपी की प्रतिमाएं उपयोग करते हैं। जिन्हें नदी, तालाब में फेंकने पर प्रदूषण बढ़ता है।संतोष बादल कहते हैं कि आज हमारा समाज जिस दूषित परिवेश में खड़ा हैं वहाँ हर उस व्यक्ति को बढावा देना चाहिए जो पर्यावरण संरक्षण की दृष्टिकोण से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। आइये हम सब इसे अपनाए और पर्यावरण संरक्षण के साथ देशी गायो का भी संरक्षण करें।
अपने दोस्त का मिला साथ:
संतोष बादल ने बताया कि लॉक डाउन में जब घर आया तो अपने मित्र शेखर कुमार से गायों के संरक्षण और गौबर व गौ मूत्र से उत्पाद बनाने पर चर्चा की।शेखर ने पंचगव्य, गुरुकुलम तमिलनाडु से गव्य सिध्य् में डिप्लोमा किया है।यहीं से निर्णय हुआ कि गाय के गौबर से प्रतिमा ,धूप,अगरबत्ती बनाया जाए।
फिल्मों में भी बनाया मुकाम:
चौरम से बिना बड़ी डिग्री हासिल किए मुंबई भागकर जो मुकाम संतोष बादल ने हासिल किया है वह विरले को ही नसीब होती है। वर्ष 1996 में मुंबई पहुंचे, सिर्फ 18 साल के थे। अपना गुरु माना इंडस्ट्री के जाने माने निर्देशक होमी वाडिया को। निर्देशक बनना चाहते थे। एक साल तक उनकी बहुत सेवा की। उनके स्टूडियो के रख रखाव से लेकर उनके घर का खाना बनाना एवं कपड़े धोना दिनचर्या में शामिल रहा। 1997 में निर्देशक बनने के पूरे फॉर्मूले को समझाया। विडियो संपादन का काम शुरू किया और 1998 तक मुख्य संपादक बन गए। साल 2000 तक एडिटर के रूप में 9 अवार्ड जीते। इंडस्ट्री में खास जगह बन गई। तब सिर्फ 21 साल उम्र थी। एकता कपूर ने बतौर निर्देशक पहला मौका दिया एशिया महादेश का सबसे हिट सीरियल साबित हुआ- ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी’। उसके बाद 2016 के अंत तक इंडस्ट्री के सारे सीरियल अपने नाम किए और लगभग 6000 एपिसोड का निर्देशन किया। हालिया निर्देशित सीरियल ” नागिन, नागिन 2, परमावतार श्री कृष्णा, हातिम सुपरहिट रही साल 2000 से 2016 तक चार फीचर फिल्म की जो चर्चित रही। उनकी फिल्म फाइनल मैच काफी सफल रहा। निर्देशक के तौर पर उन्हें नौ बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड मिल चुका है। सन 2000 का सबसे कम उम्र का निर्देशक बनने का गौरव भी प्राप्त है। इनकी इंटरनेशनल फ़िल्म ” दी रिटर्न्स ऑफ डॉक्टर जगदीश चंद्र बसु ” को नेशनल अवार्ड में भी शामिल किया गया। पर्यावरण संरक्षण पर बनी इस फ़िल्म को पूरे विश्व से 124 अवार्ड मिले और मुझे पूरी दुनिया से सराहनीय पत्र मिले। अब गाय के गोबर से प्रतिमा ,दीए, अगरबत्ती समेत कई उपयोगी चीज बना लोगो को रोजगार देने का काम कर रहे हैं।
